• तारतर गांव में NDA की 'अस्वीकार्यता'
  • BJP-JDU गठबंधन को नहीं मिला एक भी पोलिंग एजेंट
  • NDA की कमजोर पकड़ को उजागर

पटना/मोकामा: Mokama Election 2025 के पहले चरण में हुए मतदान ने सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन के सामने एक गंभीर चुनौती पेश कर दी है। मोकामा विधानसभा क्षेत्र के तारतर गांव, जो हाल ही में मारे गए दुलारचंद यादव का पैतृक गांव है, में हुई चुनावी घटना ने एनडीए की रणनीति पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, दुलारचंद की दर्दनाक हत्या के बाद उत्पन्न भारी आक्रोश के कारण, गांव के बूथों पर BJP-JDU (एनडीए) गठबंधन का एक भी पोलिंग एजेंट मौजूद नहीं था।

​यह अप्रत्याशित अनुपस्थिति न केवल Mokama Election 2025 की राजनीति में NDA की कमजोर पकड़ को उजागर करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि मतदाताओं ने कानून-व्यवस्था और न्याय के मुद्दे पर अपनी भावना स्पष्ट रूप से व्यक्त कर दी है। दुलारचंद हत्याकांड ने Mokama Election 2025 के पारंपरिक समीकरणों को पूरी तरह से उलट दिया है।

दुलारचंद हत्याकांड का गहरा असर

​दुलारचंद यादव की हत्या, जो बाहुबली नेता अनंत सिंह के विरोधी थे, ने मोकामा और आसपास के क्षेत्रों में तीव्र राजनीतिक ध्रुवीकरण को जन्म दिया है।

  • बूथों की स्थिति: तारतर गांव के मध्य विद्यालय स्थित तीन प्रमुख मतदान केंद्रों पर मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक केवल राजद (RJD) और जनसुराज (JSP) के एजेंट ही बैठे थे। एनडीए एजेंटों की अनुपस्थिति ने एक तरह से यह पुष्टि कर दी कि उन्हें इस गांव से समर्थन की उम्मीद नहीं है।
  • मतदाताओं का रुख: गांव के मतदाताओं ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी राजनीतिक गठबंधन के बजाय, हत्याकांड के बाद न्याय की मांग को प्राथमिकता दे रहे थे। Mokama Election 2025 में यह भावनात्मक वोटिंग पैटर्न एनडीए के लिए भारी पड़ सकता है।
  • अनंत सिंह की गिरफ्तारी: हत्याकांड में जदयू उम्मीदवार अनंत सिंह का नाम आने और बाद में उनकी गिरफ्तारी ने एनडीए की छवि को और नुकसान पहुंचाया। हालांकि एनडीए ने Mokama Election 2025 में चुनाव प्रचार जारी रखा, लेकिन दुलारचंद के गांव का यह बहिष्कार बताता है कि जमीनी स्तर पर आक्रोश थम नहीं रहा है।
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कानून और व्यवस्था का मुद्दा

​यह घटना Mokama Election 2025 में कानून और व्यवस्था के मुद्दे को केंद्र में ले आई है, जिसने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'सुशासन' की छवि को चुनौती दी है। दुलारचंद के समर्थक यादव और धानुक मतदाताओं के बीच भारी विरोध का माहौल है, जिसे शांत करने में एनडीए नेतृत्व विफल रहा है।


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Mokama Election 2025 के नतीजे न केवल इस सीट पर, बल्कि बाढ़, लखीसराय और वारिसलीगंज जैसी आस-पास की सीटों पर भी असंतोष की लहर पैदा कर सकते हैं। यह दर्शाता है कि बाहुबलियों पर कार्रवाई के बावजूद, स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण व्यक्तिगत रंजिश और सामाजिक न्याय के मुद्दों से कैसे प्रभावित होते हैं।

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