उधम सिंह नगर कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का धरना प्रदर्शन दूसरे दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। मौसम के बदले मिजाज और तेज बारिश के बावजूद सैकड़ों की संख्या में किसान अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे रहे। पानी और नमी के बीच भी किसानों का हौसला कम नहीं हुआ और उन्होंने चाय-नाश्ते व भोजन की व्यवस्था खुद संभालते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाया। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर पुलिस बल तैनात रहा और एसडीएम सदर भी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते नजर आए।
प्रशासनिक वार्ता रही विफल
धरने के दूसरे दिन प्रशासन के अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच वार्ता आयोजित की गई, लेकिन यह बातचीत बेनतीजा साबित हुई। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना था कि ज्ञापन में शामिल अधिकतर मांगें शासन स्तर की हैं, जिन्हें राज्य सरकार को प्रेषित कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिलाया कि केवल स्थानीय स्तर की जो समस्याएं हैं, उनका जल्द से जल्द निस्तारण कराने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, वार्ता विफल रहने के बाद किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
नेताओं को नहीं मिला मंच
इससे पहले आंदोलन में समर्थन देने किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़, खटीमा विधायक भुवन कापड़ी और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल पहुंचे। नेताओं ने किसानों के बीच बैठकर उनकी मांगों का समर्थन तो किया, लेकिन किसान नेताओं ने पहले ही साफ कर दिया था कि यह मंच पूरी तरह गैर-राजनीतिक है। किसानों द्वारा मंच साझा करने की अनुमति न दिए जाने पर तीनों नेता कुछ समय बाद वापस लौट गए। किसान नेता बाजवा ने दोहराया कि किसान अपने संघर्ष में खुद सक्षम हैं और वे किसी राजनीतिक सहारा नहीं चाहते।
स्वयं की व्यवस्था से जारी संघर्ष
किसान नेताओं का कहना है कि जब किसान खेत में काम करने निकलता है, तो अपने खान-पान का इंतजाम साथ लेकर चलता है। उसी तरह धरना स्थल पर भी टेंट, भोजन और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं किसानों ने खुद की हैं। यद्यपि प्रशासन की ओर से धरना स्थल पर पानी और बिजली की व्यवस्था की बात कही गई है, लेकिन बाकी सभी संसाधन किसानों ने अपने स्तर पर ही जुटाए हैं।
बिजली, कर्ज और जमीनों से जुड़ी मांगें
किसान ट्यूबवेलों के बिजली बिल पूरी तरह माफ करने, 300 यूनिट मुफ्त घरेलू बिजली देने और संपूर्ण कर्ज माफी की मांग पर अड़े हैं। इसके अलावा पहाड़ी जिलों के किसानों को 20 हजार रुपये प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि देने, बाजपुर क्षेत्र के 20 गांवों की भूमि पर लगी रोक हटाने, गन्ने का मूल्य 700 रुपये प्रति क्विंटल करने, वर्ष 2007 और 2011-12 के बकाया गन्ना भुगतान को तुरंत जारी करने तथा राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाने जैसी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया है।
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