उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर मुख्यालय में चल रहा किसानों का आंदोलन अब और अधिक आक्रामक हो गया है। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले कलेक्ट्रेट घेराव करने पहुंचे सैकड़ों किसानों और पुलिस-प्रशासन के बीच उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर की पहली सुरक्षा बैरिकेडिंग को बलपूर्वक तोड़ दिया। पहली बैरिकेडिंग टूटने से प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए दूसरी बैरिकेडिंग पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। इस दौरान किसानों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी नोकझोंक और गंभीर धक्का-मुक्की देखने को मिली, जिसके बाद सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया गया।
सड़क पर ही बिछी दरियां और लगा लंगर
दूसरी बैरिकेडिंग पर भारी पुलिस बल द्वारा पूरी तरह रास्ता रोक दिए जाने के बाद किसान पीछे हटने के बजाय वहीं डट गए। प्रदर्शनकारी किसानों ने कलेक्ट्रेट के सामने की मुख्य सड़क पर ही दरियां बिछा दीं और सामूहिक रूप से धरने पर बैठ गए। आंदोलन को लंबा खींचने की तैयारी के साथ किसानों ने सड़क किनारे ही अपने पारंपरिक लंगर की व्यवस्था शुरू कर दी। सैकड़ों की तादाद में आंदोलनकारियों ने सड़क पर ही बैठकर एक साथ भोजन किया। किसान नेताओं ने साफ तौर पर ऐलान किया है कि उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता और यह धरना २१, २२ और २३ अगस्त तक लगातार तीन दिनों तक जारी रहेगा। इस बड़े सड़क जाम के कारण शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
किसानों की चार प्रमुख मांगें
इस आंदोलन में किसान पूर्व में घोषित तीन मांगों के स्थान पर अब चार सूत्रीय प्रमुख मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि उनकी सबसे पहली मांग घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों के लिए ३०० यूनिट तक मुफ्त बिजली सुनिश्चित करने की है। इसके साथ ही वे किसानों के नलकूपों (ट्यूबवेल) के बिजली बिलों को पूरी तरह माफ करने की मांग कर रहे हैं। तीसरी बड़ी मांग बाजपुर क्षेत्र के २० गांवों की हजारों एकड़ भूमि का मालिकाना हक वहां के स्थानीय ग्रामीणों और किसानों को सौंपने की है। इसके अलावा किसानों ने सामाजिक सुरक्षा के तहत पुरानी पेंशन व्यवस्था को भी बहाल करने की मांग को इस आंदोलन के मुख्य एजेंडे में शामिल किया है। 
लंबे समय से समाधान न होने का आरोप
धरना स्थल पर मौजूद वरिष्ठ किसान नेताओं ने सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ तीखी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि इन चारों जायज मांगों को लेकर वे पिछले लंबे समय से अलग-अलग स्तरों पर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे हैं। शासन और प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपे गए और चेतावनियां भी दी गईं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। किसानों का आरोप है कि इसी उपेक्षा और वादाखिलाफी के कारण आखिरकार उन्हें कड़े आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा है। दूसरी तरफ कलेक्ट्रेट परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया गया है और अधिकारी लगातार किसानों से बातचीत की कोशिश कर रहे हैं।


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