उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में सड़क हादसों का ग्राफ थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार की शाम नानकमत्ता थाना क्षेत्र के अंतर्गत प्रतापपुर नंबर नौ के पास एक ऐसी ही हृदय विदारक घटना घटी, जिसने तीन परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। एक निजी स्कूल की बस ने तेज रफ्तार और लापरवाही का प्रदर्शन करते हुए बाइक सवार तीन युवकों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और उस पर सवार तीनों युवक लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़े। स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से घायलों को तत्काल खटीमा के उप जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद अस्पताल परिसर चीखों से गूंज उठा।

काम से लौटते वक्त हुआ हादसा

​मृतकों की पहचान प्रतापपुर नंबर सात निवासी देवेंद्र सिंह, राजेश सिंह पुत्र दर्शन सिंह और राजेश सिंह पुत्र पंचम सिंह के रूप में हुई है। ये तीनों युवक अपनी मेहनत और मजदूरी के बल पर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे थे। जानकारी के मुताबिक देवेंद्र और राजेश राज मिस्त्री का काम करते थे, जबकि तीसरा साथी उनके साथ मजदूरी करता था। शुक्रवार को वे झनकट क्षेत्र से कुछ जरूरी सामान खरीदकर वापस अपने गांव लौट रहे थे। शाम करीब सवा चार बजे जैसे ही उनकी बाइक देवेंद्र की देखरेख में प्रतापपुर नंबर नौ के पास पहुंची, सामने से आ रही अनियंत्रित स्कूल बस काल बनकर आई। इस हादसे ने न केवल तीन जिंदगियां लीं, बल्कि उन परिवारों के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है जो पूरी तरह इन्हीं युवाओं की कमाई पर निर्भर थे।

फरार चालक और पुलिस की कार्रवाई


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​हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। दुर्घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी बस चालक मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर मौके से फरार हो गया। पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए मोर्चरी भिजवा दिया है। प्रतापपुर चौकी प्रभारी राजेंद्र पंत ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बस चालक की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है और उन्होंने स्कूल बसों की अनियंत्रित गति पर अंकुश लगाने की मांग की है। वर्तमान में पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और पीड़ित परिवारों को सांत्वना देने वालों का तांता लगा है, लेकिन परिजनों का विलाप देखकर हर किसी की आंखें नम हैं।

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