देश में फर्जी कानून डिग्रियों के बढ़ते मामलों और सर्वोच्च अदालत की मौखिक टिप्पणियों के व्यावसायिक दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस गंभीर विषय पर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है।

​यह याचिका अधिवक्ता राजा चौधरी द्वारा दाखिल की गई है, जिस पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने कानूनी पेशे में गिरते पेशेवर मानकों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए फर्जी डिग्रियों के आधार पर प्रैक्टिस कर रहे लोगों के खिलाफ सीबीआई से निष्पक्ष और व्यापक जांच कराए जाने की मांग की है।

​मामले की पृष्ठभूमि 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई से जुड़ी है। उस दौरान अदालती प्रक्रियाओं के दुरुपयोग, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के दर्जे और कानूनी पेशे की गरिमा में आती गिरावट को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हुआ था। याचिका के मुताबिक, उसी दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने बातचीत के क्रम में रूपक के रूप में 'कॉकरोच' शब्द का संदर्भ दिया था।

​आरोप है कि चीफ जस्टिस द्वारा इस्तेमाल किए गए इस संदर्भ को बाद में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा चुनिंदा तरीके से काट-छांटकर सोशल मीडिया पर वायरल मीम्स में बदल दिया गया। इतना ही नहीं, इन संदर्भों की नकल करके 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नाम से व्यावसायिक रूप से डिजिटल कंटेंट तैयार किया गया और उसका बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया गया।


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​याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि संवैधानिक और प्रक्रियात्मक संदर्भों से अलग करके जजों की मौखिक टिप्पणियों को डिजिटल कंटेंट या मीम बनाकर बेचे जाने पर रोक लगाई जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए सभी प्रमुख पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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