उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में स्थित पैगा गांव के निवासी सुखवन्त सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई आत्महत्या के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने मामले की गहराई से जांच करने के लिए एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन करने का निर्णय लिया है। यह कदम मृतक द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए गए वीडियो और ई-मेल के माध्यम से लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद उठाया गया है।

​पुलिस महानिरीक्षक एसटीएफ नीलेश आनन्द भरणे को इस पांच सदस्यीय विशेष जांच दल की कमान सौंपी गई है। इस टीम में चम्पावत के पुलिस अधीक्षक अजय गणपति सहित टनकपुर की क्षेत्राधिकारी वन्दना वर्मा और अन्य अनुभवी पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है ताकि सच सामने आ सके।

​जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल भी किया है। इस मामले से जुड़े या संबंधित क्षेत्र में तैनात कुल बारह पुलिस कर्मियों का तत्काल प्रभाव से गढ़वाल रेंज के चमोली और रुद्रप्रयाग जनपदों में स्थानांतरण कर दिया गया है। इन कर्मियों में उपनिरीक्षक, मुख्य आरक्षी और आरक्षी शामिल हैं। यह स्थानांतरण इसलिए किया गया है ताकि स्थानीय स्तर पर जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठ सके।

​मृतक सुखवन्त सिंह ने अपनी मृत्यु से पहले कुछ साक्ष्य डिजिटल माध्यमों से साझा किए थे, जिनमें स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों और उधम सिंह नगर पुलिस के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि इन सभी वीडियो और ई-मेल में उल्लेखित तथ्यों का बारीकी से परीक्षण किया जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। इस पूरी कार्यवाही से यह संकेत मिलता है कि विभाग अपने ही कर्मियों के विरुद्ध लगे आरोपों को अत्यंत गंभीरता से ले रहे हैं।


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