रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर भक्ति और परंपरा के मिलन की उम्मीद थी, लेकिन यह आयोजन विवादों और हंगामे की भेंट चढ़ गया। अगस्त्य ऋषि की ऐतिहासिक डोली यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब डोली को मैदान में प्रवेश कराने के लिए सरकारी गेट को हथौड़ों से तोड़ दिया गया। 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित इस यात्रा में हजारों भक्त शामिल थे, लेकिन कुछ तत्वों के उग्र व्यवहार ने धार्मिक उत्सव को कानून व्यवस्था की चुनौती में बदल दिया। प्रशासन का दावा है कि डोली के लिए पारंपरिक मार्ग पर पहले ही पुख्ता इंतजाम किए गए थे, लेकिन कुछ लोगों ने जानबूझकर विवाद पैदा करने के लिए क्रीड़ा भवन के मुख्य द्वार को निशाना बनाया।
अराजकता पर जिलाधिकारी का हंटर और भारी मुकदमा
घटना के बाद जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि देवभूमि की शांति भंग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस ने त्रिभुवन चौहान, अनिल बैजवाल और राजेश बैजवाल समेत कुल 52 व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इसमें सरकारी कार्य में बाधा डालने, लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हाईवे जाम करने जैसे आरोप शामिल हैं। जिलाधिकारी ने उन लोगों को भी चिन्हित करने को कहा है जो बार-बार ऐसी घटनाओं में शामिल रहते हैं, ताकि उन पर गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सके। प्रशासन का मानना है कि यह केवल धार्मिक भावना का मामला नहीं, बल्कि सरकारी कार्य में जानबूझकर डाली गई बाधा है।
मैदान का मालिकाना हक और स्टेडियम निर्माण की रार
इस पूरे विवाद की जड़ अगस्त्यमुनि मैदान में चल रहा स्टेडियम निर्माण कार्य है। मंदिर समिति और स्थानीय ग्रामीणों का एक बड़ा धड़ा लंबे समय से इस निर्माण का विरोध कर रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि यह संपूर्ण भूमि महर्षि अगस्त्य के मंदिर की है और यहां किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप उनकी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध है। इसी विरोध के चलते पिछले कई दिनों से धरना प्रदर्शन भी जारी है। डोली यात्रा के दौरान गेट तोड़ने की घटना इसी लंबे समय से सुलग रहे असंतोष का विस्फोट मानी जा रही है। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डोली को गद्दीस्थल तक पहुंचाने के लिए विधिवत मार्ग सुरक्षित था, लेकिन भीड़ ने कानून को हाथ में लेकर न केवल यातायात बाधित किया बल्कि सरकारी संपत्ति को भी तहस-नहस कर दिया।
घंटों बंधक रहा केदारनाथ हाईवे और परेशान हुए यात्री
गुरुवार को हुए इस बवाल का सबसे बुरा असर केदारनाथ हाईवे पर देखने को मिला। लगभग तीन से चार घंटे तक मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे स्थानीय निवासियों के साथ-साथ तीर्थयात्री और पर्यटक भी फंसे रहे। सुरक्षा व्यवस्था में लगे पुलिसकर्मियों और मजिस्ट्रेट के साथ अभद्र व्यवहार की खबरें भी सामने आई हैं। वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में है और मैदान में डोली को गद्दीस्थल पर स्थापित कर दिया गया है, लेकिन पुलिस की सख्त कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। प्रशासन अब वीडियो फुटेज के आधार पर उन अन्य चेहरों की पहचान कर रहा है जिन्होंने भीड़ को उकसाने और गेट तोड़ने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
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