बाजपुर क्षेत्र में पिछले काफी समय से गदरपुर विधायक अरविंद पांडे पर जमीन हड़पने के आरोप लग रहे थे। इन आरोपों के बीच विधायक ने बुधवार को उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर सबको चौंका दिया। उन्होंने एक लिखित ज्ञापन सौंपकर प्रशासन से मांग की है कि जिस जमीन को लेकर उन पर उंगलियां उठाई जा रही हैं, वह जमीन तत्काल प्रभाव से शिकायतकर्ता को सौंप दी जाए। विधायक का यह कदम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि आमतौर पर राजनेता ऐसे मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ते हैं, लेकिन पांडे ने सीधे जमीन छोड़ने का प्रस्ताव रख दिया है।
आरोपों को बताया राजनीतिक विरोधियों का षड्यंत्र
विधायक अरविंद पांडे ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके विरुद्ध लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह से निराधार और तथ्यों से परे हैं। उन्होंने इसे एक गहरा राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया है, जिसका उद्देश्य उनकी और भारतीय जनता पार्टी की छवि को धूमिल करना है। विधायक के अनुसार, ग्राम बिजपुरी निवासी परमजीत कौर और उनका पुत्र लंबे समय से उन पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन को अवगत कराया कि वह एक जनसेवक हैं और उनकी मर्यादा उनके लिए सबसे ऊपर है, इसलिए वह किसी भी विवादित स्थिति में नहीं रहना चाहते।
प्रशासन के पाले में पहुंची अब जांच की गेंद
उपजिलाधिकारी को सौंपे गए पत्र में विधायक ने लिखा है कि यदि उनके इस कदम से किसी परिवार को संतुष्टि मिलती है और विवाद समाप्त होता है, तो उन्हें इसमें बेहद प्रसन्नता होगी। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित करने के लहजे में कहा कि बिना किसी देरी के कब्जा हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाए। विधायक के इस अप्रत्याशित रुख के बाद अब स्थानीय प्रशासन के सामने नई स्थिति पैदा हो गई है। राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन अब इस मामले में कानूनी पहलुओं की जांच कर रहा है कि क्या इस तरह से जमीन का हस्तांतरण संभव है और इसके पीछे के तकनीकी कारण क्या हैं।
समर्थकों और विरोधियों के बीच छिड़ी नई बहस
इस घटनाक्रम के बाद बाजपुर और गदरपुर की राजनीति में उबाल आ गया है। विधायक के समर्थकों का कहना है कि यह उनकी ईमानदारी और आत्मविश्वास का सबसे बड़ा प्रमाण है। समर्थकों का तर्क है कि जिस व्यक्ति के मन में चोर नहीं होता, वही इतनी बड़ी संपत्ति को छोड़ने की बात कह सकता है। दूसरी ओर, राजनीतिक गलियारों में जानकार इसे एक सोची-समझी रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं। चर्चा है कि विधायक ने इस कदम के जरिए गेंद प्रशासन के पाले में डाल दी है, जिससे अब आरोप लगाने वालों को अपनी बात साबित करने का दबाव झेलना पड़ेगा। फिलहाल सभी की निगाहें एसडीएम के अगले कदम पर टिकी हैं।
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