उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले से शुरू हुई सुखवंत सिंह की मौत की गुत्थी अब सीधे सत्ता के गलियारों और पुलिस महकमे की दहलीज तक जा पहुंची है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित विशेष अन्वेषण दल ने आईटीआई थाने पहुंचकर विवेचना का मोर्चा संभाल लिया है। यह केवल एक साधारण आत्महत्या का मामला नहीं रह गया है, बल्कि उन व्यवस्थाओं पर एक बड़ा सवालिया निशान है जिनके संरक्षण में एक व्यक्ति को अपनी जीवनलीला समाप्त करने जैसा खौफनाक कदम उठाना पड़ा। SIT की टीम ने केस डायरी और तमाम अभिलेखों को अपने कब्जे में लेकर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। काठगोदाम थाने से प्राप्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मोबाइल साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है ताकि इस मौत के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

मौत से पहले का वो ईमेल बनेगा सबसे बड़ा हथियार

​इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ सुखवंत सिंह द्वारा भेजा गया वह ईमेल है, जिसे अब SIT की टेक्निकल टीम खंगाल रही है। सूत्र बताते हैं कि इस ईमेल में मृतक ने अपनी पीड़ा के साथ-साथ उन तमाम स्थानीय लोगों और पुलिस अधिकारियों के नामों का जिक्र किया है जिन्होंने उसे मानसिक और प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित किया था। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ईमेल के एक-एक शब्द की सत्यता की जांच कर रही है ताकि कोर्ट में इसे ठोस सबूत के तौर पर पेश किया जा सके। पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ के कड़े निर्देशों के बाद अब यह स्पष्ट है कि जांच में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। डिजिटल साक्ष्यों के साथ-साथ घटना में इस्तेमाल किए गए हथियार और मोबाइल फोन को फॉरेंसिक साइंस लैब भेज दिया गया है।

मैजिस्ट्रेट जांच के समांतर SIT की सख्त कार्रवाई


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​प्रशासनिक स्तर पर कुमाऊं मंडल के आयुक्त द्वारा की जा रही मैजिस्ट्रेट जांच तो अपनी जगह जारी है, लेकिन आपराधिक पहलुओं को सुलझाने का जिम्मा पूरी तरह से आईजी एसटीएफ की अध्यक्षता वाली SIT पर है। इस दोहरी जांच प्रक्रिया से यह संकेत मिलता है कि सरकार और प्रशासन इस बार किसी भी कीमत पर दोषियों को बख्शने के मूड में नहीं हैं। समाज में इस मामले को लेकर जबरदस्त आक्रोश है और लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर वे कौन लोग थे जिन्होंने एक हंसते-खेलते व्यक्ति को मौत की आग में झोंक दिया। जांच टीम की नजर अब उन कड़ियों को जोड़ने पर है जो स्थानीय स्तर पर चल रहे भ्रष्टाचार और प्रताड़ना के खेल को उजागर करती हैं। पुलिस महानिदेशक ने साफ कर दिया है कि यह परीक्षण निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन होगा, जिससे सत्य की जीत सुनिश्चित हो सके।

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