उधम सिंह नगर जनपद की गदरपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम विजपुरी का यह प्रकरण अब एक कानूनी और राजनीतिक संग्राम में तब्दील हो चुका है। एसडीएम अमृता शर्मा के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुजुर्ग महिला परमजीत कौर के आवास पर बेदखली का नोटिस चस्पा किया है। प्रशासन का तर्क है कि यह संपूर्ण भूमि सीलिंग एक्ट के दायरे में आती है और महेंद्र कौर बनाम उत्तराखंड सरकार के पुराने कानूनी वादों के आधार पर इसे सरकारी संपत्ति घोषित किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि करीब दस एकड़ भूमि को सरकारी कब्जे में लेने की प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया गया है। बाकी बची भूमि जिस पर भवन आदि निर्मित हैं, पर 15 दिनों के भीतर कब्जा नहीं छोड़ा गया तो बलपूर्वक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
बुजुर्ग महिला के आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में बुजुर्ग महिला परमजीत कौर हैं, जो लंबे समय से न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं। महिला का आरोप है कि उन्होंने वर्ष 1998 में ही इस जमीन से संबंधित कानूनी लड़ाई जीत ली थी। उनका कहना है कि वर्तमान विधायक और पूर्व खेल मंत्री अरविंद पांडेय तथा उनके भाई ने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर उनके साथ धोखाधड़ी की है। महिला के अनुसार उन्होंने केवल एक एकड़ भूमि सीमित समय के लिए लीज पर दी थी, लेकिन दस्तावेजों में हेरफेर कर उनकी ढाई एकड़ जमीन को तीस साल की लंबी अवधि के लिए लीज पर दर्ज कर दिया गया। यह विवाद साल 2021 से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है और महिला कई बार सार्वजनिक रूप से आत्मदाह की चेतावनी भी दे चुकी है।
व्यवस्था की कार्यप्रणाली
प्रशासन की इस तीव्र कार्रवाई ने कई ऐसे बिंदुओं को जन्म दिया है जो व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। एक तरफ प्रशासन इस भूमि को सीलिंग की बताकर खाली करने का दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी के निकट स्थित उन्नीस एकड़ भूमि पर बन रहे मेडिकल कॉलेज को एनओसी मिलने की बात सामने आ रही है। सवाल यह उठाया जा रहा है कि यदि जमीन का स्वरूप सरकारी या सीलिंग का था, तो अन्य संपत्तियों के लिए भू-उपयोग परिवर्तन की अनुमति कैसे प्राप्त हुई। साथ ही, जब मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी, तो उसकी अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पहले ही बेदखली का नोटिस थमा दिया गया। जिसके बाद यह कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है।
समझौते की हकीकत
यह विवाद विद्या ज्योति एजुकेशन सोसायटी और पीड़ित परिवार के दावों के बीच फंसा हुआ है। जहाँ सोसायटी अपने दस्तावेजों को कानूनी रूप से सही और पारदर्शी बता रही है, वहीं परमजीत कौर इसे उनके अस्तित्व को मिटाने की साजिश करार दे रही हैं। गुरुवार को हुई घटना ने सभी को तब हैरान कर दिया जब आरोपों से घिरे विधायक खुद एसडीएम दफ्तर पहुंचकर महिला के समर्थन की बात करने लगे, लेकिन उसी शाम प्रशासन ने महिला को घर से बाहर निकालने का फरमान सुना दिया। वर्तमान में यह मामला न केवल एक कानूनी लड़ाई है बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सरकारी तंत्र की जवाबदेही के बीच एक बड़ी जंग बन गया है, जिसका फैसला अब आने वाले 15 दिनों की मोहलत पर टिका है।
---समाप्त---