किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ के पुत्र और पार्षद सौरभ बेहड़ पर 18 जनवरी की शाम हुए कथित हमले ने पूरी देवभूमि की राजनीति में भूचाल ला दिया था। शुरुआती सूचना में इसे एक सोची-समझी हत्या की कोशिश के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन ऊधमसिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा को पहली नजर में ही कहानी के कुछ पन्ने धुंधले नजर आए। पुलिस ने जब इस मामले की तहकीकात शुरू की, तो सबसे पहले घटनास्थल यानी आवास विकास मुख्य मार्ग से लेकर संदिग्धों के भागने वाले सभी रास्तों के लगभग 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों को खंगाला गया। पुलिस की एसओजी और सर्विलांस सेल ने जब मोबाइल टावर लोकेशन और कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड की जांच की, तो कड़ियां आपस में जुड़ने के बजाय उलझने लगीं। जांच में पता चला कि घटना के वक्त जो हमलावर मोटर साइकिल पर थे, उनके पीछे एक सफेद रंग की वैगनार कार लगातार चल रही थी। यहीं से पुलिस का शक यकीन में बदल गया कि यह कोई रंजिश नहीं बल्कि एक सोची-समझी स्क्रिप्ट का हिस्सा है।
साजिश का ताना-बाना बुन किया फर्जी हमले का ब्लूप्रिंट तैयार
पुलिस के खुलासे के अनुसार, सौरभ बेहड़ ने अपने बेहद करीबी दोस्त इंदर नारंग के साथ मिलकर इस पूरी साजिश का ब्लूप्रिंट तैयार किया था। सौरभ का उद्देश्य केवल हमला करवाना नहीं था, बल्कि वह अपनी निजी जिंदगी और पत्नी के साथ चल रहे विवादों में खुद को एक 'पीड़ित' के रूप में स्थापित करना चाहता था। वह चाहता था कि समाज और विरोधियों के बीच उसे भारी सहानुभूति मिले। इसके लिए उसने इंदर नारंग को सख्त हिदायत दी थी कि हमला ऐसा दिखना चाहिए जिससे लोग डर जाएं, लेकिन उसे गंभीर चोट न आए। इंदर नारंग ने इस काम के लिए घासमंडी और ठाकुर नगर इलाके के तीन नौजवानों—वंश और दीपक सहित एक अन्य—को लालच देकर तैयार किया। पुलिस ने बताया कि इन युवकों को यह कहकर तैयार किया गया कि यह केवल डराने-धमकाने का मामला है। हमलावरों को सख्त निर्देश थे कि वे अपनी पहचान पूरी तरह छिपाकर रखें, जिसके लिए उन्होंने हेलमेट और नकाब का सहारा लिया और अपनी बाइक की नंबर प्लेट तक उखाड़ फेंकी थी।
शिव शक्ति पीजी के पास हुआ स्क्रिप्टेड अटैक
18 जनवरी की शाम को जब सौरभ अपनी स्कूटी से निकले, तो योजना के मुताबिक हमलावर उनका पीछा करने लगे। पहले मुख्य मार्ग पर हमला करने की कोशिश की गई, लेकिन वहां भीड़ अधिक होने के कारण इंदर नारंग ने हमलावरों को रुकने का इशारा किया। इसके बाद जैसे ही सौरभ बेहड़ शिव शक्ति पीजी गेट के पास पहुँचे, वहाँ सन्नाटा पाकर हमलावरों ने उनकी स्कूटी को लात मारकर गिरा दिया। इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई ताकि चोटों के निशान असली लगें। इंदर नारंग अपनी कार से कुछ दूरी पर खड़ा होकर इस पूरी 'शूटिंग' की निगरानी कर रहा था। हमला करने के बाद तीनों युवक मौके से फरार हो गए और इंदर नारंग ने उन्हें अपनी कार में बैठाकर सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया। पुलिस ने जब इंदर को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, तो उसने सारा सच उगल दिया और बताया कि कैसे सौरभ ने खुद उसे अपने घर बुलाकर इस हमले की सुपारी दी थी।
हथियारों की बरामदगी और हाई-प्रोफाइल ड्रामा
पुलिस ने इस मामले में न केवल साजिश का खुलासा किया, बल्कि आरोपियों के पास से दो अवैध तमंचे और एक चाकू भी बरामद किया है। एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने बताया कि इन हथियारों का इस्तेमाल मौके पर दहशत फैलाने और घटना को 'जानलेवा' दिखाने के लिए किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि घटना के तुरंत बाद जिस तरह से कांग्रेस और भाजपा के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगा और बाजार बंद करने की धमकियां दी गईं, वह सब उस दबाव का हिस्सा था जिसे सौरभ पैदा करना चाहता था। हालांकि, पुलिस की तकनीकी दक्षता ने इस राजनीतिक ड्रामे का पटाक्षेप कर दिया। पुलिस अब इस मामले में अन्य कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है कि किस तरह से सरकारी मशीनरी को गुमराह करने और शहर की शांति व्यवस्था को खतरे में डालने के लिए आरोपियों पर सख्त धाराओं में कार्रवाई की जा सके।
भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिता का सार्वजनिक पश्चाताप
जब पुलिस ने इस साजिश का कच्चा चिट्ठा विधायक तिलक राज बेहड़ के सामने रखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। एक कद्दावर राजनेता होने के नाते उन्होंने इस स्थिति में जो कदम उठाया, उसने सभी को हैरान कर दिया। बेहड़ ने अपने आवास पर एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, जहाँ उनकी आँखों में आंसू और स्वर में भारी ग्लानि थी। उन्होंने बेहद भारी मन से स्वीकार किया कि उनका अपना ही 'सिक्का खोटा' निकला। एक पिता के रूप में वे पूरी तरह टूटते नजर आए लेकिन एक जनप्रतिनिधि के तौर पर उन्होंने नैतिकता की मिसाल पेश की। उन्होंने सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर पूरे समाज, व्यापारी संगठनों और उन सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं से माफी मांगी, जो घटना के बाद उनके समर्थन में सड़कों पर उतरने को तैयार थे।
पारिवारिक संबंधों का अंत
विधायक तिलक राज बेहड़ ने इस दौरान एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने पुत्र सौरभ बेहड़ से सभी प्रकार के पारिवारिक संबंध विच्छेद करने की घोषणा कर दी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सौरभ ने जो किया है वह अक्षम्य है और इससे उनके परिवार की साख को गहरी चोट पहुँची है। बेहड़ ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी गलत काम का समर्थन नहीं करेंगे, चाहे वह उनका अपना रक्त ही क्यों न हो। उन्होंने पुलिस प्रशासन से यह भी कहा कि सौरभ ने जो अपराध किया है, उसे उसकी सजा मिलनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने साजिश में शामिल उन छात्रों के प्रति नरमी दिखाने की बात कही जो सौरभ के बहकावे में आकर मोहरा बन गए थे। विधायक की इस ईमानदारी और साहसिक कदम की अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है, जहाँ उन्होंने पुत्र मोह को त्याग कर सत्य और नैतिकता को ऊपर रखा।
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