• सिस्टम के खिलाफ सुलगता जन-आक्रोश

​रुद्रपुर में शैल संस्कृति समिति और विभिन्न कॉलोनियों के सैकड़ों लोगों ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच के लिए विशाल कैंडल मार्च निकाला। किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल सहित भारी जनसमूह ने गोलज्यू मंदिर पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई।

सिस्टम के खिलाफ सुलगता जन-आक्रोश

​देवभूमि उत्तराखंड की शांत फिजाओं में अंकिता भंडारी हत्याकांड की टीस आज भी बरकरार है। रुद्रपुर की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि इंसाफ की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। शैल संस्कृति समिति के बैनर तले आयोजित इस कैंडल मार्च ने शासन और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि अंकिता केवल एक परिवार की बेटी नहीं थी, बल्कि वह पूरे उत्तराखंड की अस्मिता का प्रतीक बन चुकी है। जिस तरह से जांच की कड़ियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उसने जनता के भीतर एक गहरे अविश्वास को जन्म दिया है। यही कारण है कि अब लोग केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई और केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की दखल चाहते हैं।


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न्याय की गुहार लेकर गोलज्यू मंदिर तक पदयात्रा

​इंसाफ की यह मशाल कौशल्या, नंद विहार, आनंद विहार, मैत्री विहार कॉलोनी, मां सरस्वती, हिल व्यू सिटी, फुलसुंगा, फुलसुंगी और बालाजीपुरम सहित अनेकों कॉलोनियों से होकर गुजरी। इन क्षेत्रों के सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने एकजुट होकर दक्ष चौराहे से गोल्ज्यू मंदिर तक कैंडल मार्च निकाला। इस मार्च का सबसे भावुक और शक्तिशाली क्षण वह था जब भारी हुजूम ने न्याय के देवता भगवान गोल्ज्यू के दरबार में माथा टेका। लोगों ने अटूट विश्वास के साथ न्याय के देवता से प्रार्थना की कि जो न्याय इंसानी सिस्टम नहीं दे पा रहा, वह ईश्वरीय शक्ति अंकिता को दिलाए। इस दौरान अंकिता के समर्थन में लगे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।

राजनैतिक एकजुटता और सामूहिक ललकार

​इस न्याय युद्ध में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनभावनाओं का ज्वार देखने को मिला। मार्च में किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कंधे से कंधा मिलाकर जनता की आवाज बुलंद की। उनके साथ मोहन खेड़ा, संजय जुनेजा, पूर्व दर्जा राज्यमंत्री हरीश पनेरू, और हरीश मिश्रा जैसे कद्दावर चेहरे भी शामिल हुए। जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि अंकिता के माता-पिता आज भी न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं और वर्तमान जांच प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं। नेताओं ने एक सुर में सरकार को चेतावनी दी कि अगर जांच पारदर्शी है, तो सीबीआई को मामला सौंपने के लिए हिचकिचाहट क्यों हो रही है।

मातृशक्ति का रौद्र रूप और भारी भागीदारी

​इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका क्षेत्र की मातृशक्ति की रही। हंसी मिश्रा, प्रभा मिश्रा, नेहा पांडे, हेमा गोस्वामी, रूपाली चौहान, श्वेता गंगवार, कंचन हरबोला और कल्पना पांडे जैसी महिलाओं के नेतृत्व में महिलाओं ने व्यवस्था के प्रति भारी रोष प्रकट किया। मार्च में गोपाल पटवाल, राजेंद्र बोरा, दिनेश बम, लाल सिंह, शिशुपाल, संजय सिंह, अशोक चोपड़ा, दीपक कुमार, आशीष, कैलाश भंडारी, अवधेश महाराज, नागेंद्र तिवारी, हेम पंत, सुनीता और मनीषा पांडे सहित सैकड़ों जागरूक नागरिकों ने प्रतिभाग किया। प्रदर्शनकारियों ने तीखे शब्दों में कहा कि जब तक वीआईपी का नाम सार्वजनिक नहीं होता, तब तक देवभूमि की कोई भी बेटी सुरक्षित महसूस नहीं करेगी। यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि अब उत्तराखंड की जनता चुप नहीं बैठेगी।

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