उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर आज रुद्रपुर की सड़कों पर भारी हंगामा और आक्रोश देखने को मिला। किच्छा से कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करने के लिए कूच किया। इस प्रदर्शन के दौरान पूरे शहर में "अंकिता के हत्यारों को फांसी दो" और "अंकिता हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं" जैसे नारों की गूंज सुनाई दी।

​प्रशासन ने कांग्रेसियों को रोकने के लिए कलेक्ट्रेट के पास भारी पुलिस बल तैनात किया था और पुख्ता बैरिकेडिंग की थी। हालांकि, न्याय की मांग कर रहे कार्यकर्ताओं का जोश इतना अधिक था कि वे पुलिस के घेरे को चीरते हुए आगे बढ़ गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जबरदस्त धक्का-मुक्की हुई, लेकिन पुलिस उन्हें रोकने में पूरी तरह नाकाम रही। कार्यकर्ताओं के आक्रोश के सामने पुलिस की तमाम व्यवस्थाएं बौनी साबित हुईं।

​मीडिया से वार्ता करते हुए विधायक तिलक राज बेहड़ ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने कहा कि अंकिता को इंसाफ दिलाने के बजाय सरकार उस 'वीवीआईपी' को बचाने में लगी है, जिसका नाम इस पूरे मामले में बार-बार सामने आता रहा है। कांग्रेस की मुख्य मांग है कि उस रसूखदार वीवीआईपी का नाम सार्वजनिक किया जाए और पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराई जाए।

​विधायक बेहड़ ने सरकार की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जिस महिला ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का सच उजागर करने की हिम्मत दिखाई, सरकार ने बदले की भावना से काम करते हुए उसी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार तंत्र का दुरुपयोग कर सच को दबाना चाहती है। तिलक राज बेहड़ ने स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, कांग्रेस का यह आंदोलन थमेगा नहीं।


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