देवभूमि की शांत फिजाओं में जब आधी रात को देहरादून के डोईवाला की सड़कें सुनसान थीं, तब कुछ साये एक बड़ा खेल खेलने की फिराक में थे। पुलिस की एक टुकड़ी लालतप्पड़ चौकी के पास मुस्तैद खड़ी थी, जिसे शायद इस बात का इल्म भी नहीं था कि कुछ ही देर में उनका सामना इलाके की सबसे खतरनाक हिस्ट्रीशीटर से होने वाला है। एक स्कूटी अंधेरे को चीरती हुई आगे बढ़ रही थी, जिस पर सवार तीन चेहरे सामान्य दिखने की कोशिश तो कर रहे थे, लेकिन पुलिस की पैनी नजरों ने उनकी घबराहट को भांप लिया। जैसे ही पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया, हवा में एक अनजाना डर तैरने लगा। यह महज एक सामान्य चेकिंग नहीं थी, बल्कि एक ऐसे काले साम्राज्य के अंत की शुरुआत थी जो लंबे समय से जड़ें जमाए बैठा था।
स्कूटी की डिक्की और खौफनाक राज
जब पुलिस ने संदिग्धों को घेरकर उनकी तलाशी लेनी शुरू की, तो माहौल में तनाव चरम पर पहुंच गया। स्कूटी की डिक्की और आरोपियों के पास मौजूद पोटलियों में वह सामान छिपा था, जो हजारों जिंदगियों को तबाह करने के लिए काफी था। खाकी ने जब एक-एक कर उन लिफाफों को खोला, तो सामने आई वह सफेद मौत जिसे स्मैक कहा जाता है। एक-एक ग्राम की तौल बढ़ती गई और आंकड़ा लगभग 50 ग्राम तक पहुंच गया। बाजार में इस खेप की कीमत जब आंकी गई, तो पुलिस के अधिकारी भी हैरान रह गए। पंद्रह लाख रुपये का यह नशीला जहर डोईवाला की गलियों में खपाने की तैयारी थी। सोनी और उसके साथियों का वह 'सीक्रेट मिशन' अब पुलिस की डायरी में दर्ज हो चुका था।
लेडी डॉन का पुराना हिसाब और नई मुसीबत
पकड़ी गई महिला कोई और नहीं बल्कि डोईवाला की कुख्यात हिस्ट्रीशीटर सोनी थी। वह कानून की आंखों में धूल झोंकने में माहिर मानी जाती है, लेकिन इस बार नियति ने उसके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। सोनी के साथ मौजूद नेहा और अनूप कुमार उर्फ आशू भी पुराने खिलाड़ी निकले, जिनका इतिहास संगीन अपराधों से भरा पड़ा है। सोनी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट जैसे गंभीर मुकदमे पहले से ही पुलिस फाइलों की शोभा बढ़ा रहे हैं। पुलिस को लंबे समय से इसकी तलाश थी और इस बार वह अपने ही बुने हुए जाल में फंस गई। जिस स्कूटी को वह अपनी ढाल बना रही थी, वही अब पुलिस थाने के यार्ड में अपनी अगली सजा का इंतजार कर रही है।
खाकी की चेतावनी और बढ़ता शिकंजा
इस गिरफ्तारी के साथ ही ऋषिकेश पुलिस ने साफ कर दिया है कि तस्कर चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में चल रहा यह अभियान अब उन बड़े मगरमच्छों की तलाश में है, जो सोनी जैसे प्यादों का इस्तेमाल कर शहर में मौत का सामान सप्लाई करते हैं। पुलिस ने अब उन कड़ियों को जोड़ना शुरू कर दिया है कि आखिर पंद्रह लाख की यह खेप कहां से आई और इसके असली खरीदार कौन थे। फिलहाल, तीनों आरोपी सलाखों के पीछे अपने किए की सजा भुगत रहे हैं, लेकिन पुलिस की यह कार्रवाई एक बड़े तूफान की आहट है जो नशा माफियाओं को जड़ से उखाड़ने के लिए तैयार है।
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