राजस्थान के श्री गंगानगर जिले से एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है जिसने समाज और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। इसे इंदौर के कुख्यात राजा रघुवंशी हत्याकांड की तर्ज पर 'हनीमून मर्डर' कहा जा रहा है क्योंकि यहां भी सात फेरों के बंधन को एक सोची-समझी साजिश के तहत खून से रंगा गया। इस घटना की मुख्य सूत्रधार 23 वर्षीय अंजू है जिसने अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत के मात्र 90 दिनों के भीतर ही अपने सुहाग को मौत के घाट उतारने का क्रूर फैसला ले लिया। यह पूरी वारदात किसी फिल्मी पटकथा जैसी नजर आती है जहां प्यार के नाम पर एक निर्दोष व्यक्ति की जान ले ली गई और कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए दुर्घटना का सहारा लिया गया।

एक्सीडेंट का नाटक और पुलिस की पैनी नजर

बीती 30 जनवरी की रात जब रावला पुलिस स्टेशन इलाके के अनूपगढ़ रोड पर आशीष और अंजू बेहोशी की हालत में मिले तो पहली नजर में यह एक सामान्य हिट एंड रन का मामला लग रहा था। अंजू ने पुलिस के सामने यह कहानी गढ़ी कि एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मारी और लुटेरों ने उसके जेवरात छीन लिए। हालांकि पुलिस अधीक्षक अमृतु दुहान के नेतृत्व में जब जांच शुरू हुई तो पुलिस को अंजू की बातों में झोल नजर आने लगा। क्राइम सीन और एफएसएल की टीम ने जब बारीकी से मुआयना किया तो वहां किसी तेज रफ्तार टक्कर के निशान नहीं मिले। सबसे ज्यादा संदेह तब पैदा हुआ जब डॉक्टरों ने आशीष के शरीर पर मारपीट और गला घोंटने के निशान पाए जबकि उसी मौके पर मौजूद अंजू को एक खरोंच तक नहीं आई थी।

कॉल रिकॉर्ड्स से बेनकाब हुआ असली चेहरा

जांच की दिशा तब पूरी तरह बदल गई जब पुलिस ने अंजू के मोबाइल फोन की सीडीआर खंगाली। तकनीकी जांच में यह साफ हो गया कि अंजू अपने मायके सादुलशहर के रहने वाले पुराने प्रेमी संजू के साथ लगातार संपर्क में थी। वह शादी के बाद जब अपने मायके गई थी तभी इस पूरे हत्याकांड की साजिश रच ली गई थी। उसने संजू और उसके दो अन्य साथियों रॉकी और बादल को पूरी योजना में शामिल किया। घटना वाली रात अंजू जानबूझकर आशीष को टहलने के बहाने सुनसान सड़क पर ले गई जहां पहले से घात लगाकर बैठे आरोपियों ने आशीष पर हमला कर दिया। उन्होंने उसे तब तक पीटा जब तक उसने दम नहीं तोड़ दिया और अंत में गला घोंटकर उसकी मृत्यु सुनिश्चित की।

सलाखों के पीछे पहुंचे चारों गुनहगार

अंजू ने लूटपाट का झूठा स्वांग रचने के लिए अपने गहने और मोबाइल खुद ही आरोपियों को सौंप दिए थे ताकि पुलिस गुमराह हो सके। लेकिन पुलिस की कड़ी पूछताछ और वैज्ञानिक साक्ष्यों के सामने अंजू ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई। उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी पत्नी अंजू, उसके प्रेमी संजू और सहयोगी रॉकी उर्फ रोहित व बादल उर्फ सिद्धार्थ को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। इस सनसनीखेज वारदात ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कैसे प्यार के जुनून में इंसान हैवानियत की हदें पार कर जाता है।


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