बिहार के दरभंगा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न्याय व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है। जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में एक मामूली आर्थिक विवाद ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि देखते ही देखते पूरे ब्राह्मण समाज को कटघरे में खड़ा कर दिया गया। यह मामला महज मारपीट या पैसों के बकाया होने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे सामूहिक शोषण और जातिगत रंग देकर एक अनोखा कानूनी संकट पैदा कर दिया गया है। 31 जनवरी की वह रात गांव के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई, जब एक निर्माण कार्य के बकाया पैसों को लेकर शुरू हुई बहस खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई।

एससी-एसटी एक्ट का प्रहार और सामूहिक अभियुक्तों की फौज

अशर्फी पासवान नामक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी ने सबको चौंका दिया है। आरोप है कि करीब ढाई लाख रुपये के बकाया भुगतान को लेकर जब बात बढ़ी, तो गांव के एक विशेष वर्ग ने संगठित होकर हमला किया। लेकिन इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अशर्फी पासवान ने व्यक्तिगत लड़ाई को पूरे समाज की लड़ाई बताते हुए करीब 70 ब्राह्मणों को नामजद और 150 अज्ञात लोगों को अभियुक्त बना दिया है। कानून की धाराओं का ऐसा सामूहिक उपयोग विरले ही देखने को मिलता है। इस एफआईआर ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वास्तव में एक पूरा गांव सामूहिक रूप से किसी एक परिवार के शोषण में शामिल हो सकता है या फिर यह कानून की पेचीदगियों का सहारा लेकर प्रतिशोध लेने की एक सोची-समझी रणनीति है।

प्रवासी मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों पर भी मुकदमे की मार

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे विचलित करने वाला पहलू यह है कि जिन लोगों के नाम प्राथमिकी में दर्ज किए गए हैं, उनमें से अधिकांश लोग गांव में मौजूद ही नहीं थे। बताया जा रहा है कि नामजद किए गए कई ब्राह्मण युवक देश के विभिन्न महानगरों में अपनी आजीविका चला रहे हैं और महीनों से गांव नहीं आए हैं। ऐसे में सामूहिक रूप से सबको अभियुक्त बनाना न केवल न्याय के सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होता है, बल्कि उन निर्दोष लोगों के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है जो मेहनत-मजदूरी कर अपना घर चला रहे हैं। एनजीओ राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो ने भी इस मामले को उजागर करते हुए कानून के इस अजीबो-गरीब इस्तेमाल पर चिंता जताई है, जिससे यह साफ है कि मामला अब स्थानीय सीमाओं को लांघ चुका है।

तनाव के साये में हरिनगर और पुलिस की कार्यप्रणाली

वर्तमान में हरिनगर गांव एक छावनी में तब्दील हो चुका है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 12 लोगों को हिरासत में लिया है और पूछताछ जारी है। हालांकि गांव में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल तैनात हैं, लेकिन ग्रामीणों के मन में व्याप्त आक्रोश और डर को कम करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि 31 जनवरी की रात मारपीट में दोनों तरफ से लोग घायल हुए थे, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। यह घटना बिहार की कानून व्यवस्था के लिए एक लिटमस टेस्ट की तरह है।


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