पटना के उत्तरी मंदिरी इलाके में शुक्रवार की रात साधारण नहीं थी। करीब साढ़े नौ बजे जब पूरा शहर सोने की तैयारी कर रहा था, तब भारी संख्या में पुलिस बल ने पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के आवास को चारों तरफ से घेर लिया। सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह और सचिवालय डीएसपी अनु कुमारी के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस टीम वहां एक पुराने मामले में वारंट का तामिला कराने पहुंची थी। देखते ही देखते सांसद के आवास के बाहर समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस और समर्थकों के बीच तीखी बहस का सिलसिला शुरू हुआ, जो करीब ढाई घंटे तक चलता रहा। समर्थक लगातार वारंट की कॉपी दिखाने की मांग कर रहे थे, जबकि पुलिस अपनी कार्रवाई पूरी करने पर अड़ी रही।
बीमारी का हवाला और समर्थकों का हंगामा
गिरफ्तारी के इस घटनाक्रम के दौरान सांसद पप्पू यादव ने अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए तुरंत जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वह बीमार हैं और रात में दवा लेकर सोते हैं, इसलिए पुलिस को सुबह आना चाहिए। हालांकि, कानून के शिकंजे में कस चुकी पुलिस पीछे हटने को तैयार नहीं थी। आवास के भीतर और बाहर रस्साकशी का दौर चलता रहा। समर्थकों ने पुलिस की गाड़ियों को रोकने की कोशिश की और जमकर नारेबाजी की। अंततः रात के ठीक 12 बजे पुलिस ने उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाया और चिकित्सकीय जांच के लिए आईजीआईएमएस अस्पताल ले गई। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पूरे इलाके में भारी अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
क्या है तीन दशक पुराना वह मामला
यह पूरा मामला वर्ष 1995 का है, जो पटना के गर्दनीबाग थाने में कांड संख्या 552/95 के रूप में दर्ज है। शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया था कि उनका मकान धोखाधड़ी के जरिए किराए पर लिया गया और उन्हें धमकियां दी गईं। एमपी-एमएलए कोर्ट में लंबे समय से इस मामले की सुनवाई चल रही थी। कोर्ट द्वारा बार-बार समन जारी किए जाने के बावजूद पप्पू यादव अदालत में पेश नहीं हो रहे थे। तीन दिन पहले ही कोर्ट ने इस मामले में उनकी संपत्ति कुर्की का आदेश भी दिया था। लगातार अनुपस्थिति के कारण ही अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया, जिसे तामिल कराने के लिए पटना पुलिस को इस तरह की बड़ी कार्रवाई करनी पड़ी।
राजनीतिक बदले की भावना का आरोप
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव के तेवर तल्ख नजर आए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया। सांसद का कहना है कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है और इस गिरफ्तारी के पीछे गहरी सियासी साजिश है। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई और कहा कि उनकी जान को खतरा हो सकता है। फिलहाल, सांसद की गिरफ्तारी ने बिहार की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां पुलिस इसे विशुद्ध रूप से कानूनी प्रक्रिया बता रही है, वहीं पप्पू यादव के समर्थक इसे सरकार की तानाशाही मान रहे हैं।
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