नई दिल्ली, (उत्तराखण्ड तहलका): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20वें G-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग के लिए रवाना हो गए हैं। यह शिखर सम्मेलन इस मायने में ऐतिहासिक है कि यह अफ्रीकी महाद्वीप पर आयोजित होने वाला पहला G-20 आयोजन है। भारत की हालिया सफल ग्रुप ऑफ ट्वेंटी अध्यक्षता के बाद, यह यात्रा वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव को और मजबूत करती है।

इस वर्ष के ग्रुप ऑफ ट्वेंटी शिखर सम्मेलन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति और चीन के राष्ट्रपति अनुपस्थित रहेंगे। इन दोनों प्रमुख नेताओं की गैर-मौजूदगी के कारण, इस बार का शिखर सम्मेलन अमेरिका और मेजबान दक्षिण अफ्रीका के बीच कुछ भू-राजनीतिक तनावों का केंद्र बन सकता है, खासकर ब्रिक्स (BRICS) देशों के संदर्भ में।

G-20: वैश्विक आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच
G-20 यानी ग्रुप ऑफ ट्वेंटी दुनिया की 20 प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर-सरकारी मंच है। यह समूह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (Global GDP) का लगभग 85% और वैश्विक व्यापार का 75% से अधिक का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही दुनिया की दो-तिहाई आबादी इसके सदस्य देशों में निवास करती है।
ग्रुप ऑफ ट्वेंटी का प्राथमिक उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श और समन्वय करना है। इसकी स्थापना 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद हुई थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना था। समय के साथ, इसका एजेंडा आर्थिक मुद्दों से आगे बढ़कर जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और सतत विकास तक विस्तृत हुआ है।
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G-20 में भारत का बढ़ता रोल
भारत G-20 के एक सक्रिय और महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को एक मंच प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया है। भारत की हालिया अध्यक्षता (2022-2023) के दौरान, 'वसुधैव कुटुंबकम्' (One Earth, One Family, One Future) के विषय के साथ, ग्रुप ऑफ ट्वेंटी में अफ्रीकी संघ (African Union) को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल कराने की ऐतिहासिक पहल की गई।
यह G-20 के दायरे को समावेशी बनाने और विकासशील देशों के हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में भारत के अटूट समर्पण को दर्शाता है। भारत लगातार तकनीकी समाधानों, विशेषकर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को वैश्विक स्तर पर अपनाने पर ज़ोर दे रहा है।
जोहान्सबर्ग में भारत का एजेंडा और उद्देश्य
जोहान्सबर्ग में, प्रधानमंत्री मोदी सदस्य देशों के साथ G-20 के एजेंडे पर आगे की चर्चा करेंगे, जिसमें समावेशी विकास, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वित्तपोषण, बहुपक्षीय संस्थाओं (Multilateral Institutions) में सुधार, और डिजिटल परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की बैठकों का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में सामूहिक प्रयास करने पर जोर देना होगा। यह G-20 मंच भारत के नेतृत्व में वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ग्रुप ऑफ ट्वेंटी में कौन-कौन से देश हैं सदस्य
G-20 में 19 देश शामिल हैं: अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका तथा दो क्षेत्रीय निकाय , अर्थात् यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ। ग्रुप ऑफ ट्वेंटी के सदस्यों में विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 85% , अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का 75% से अधिक तथा विश्व की लगभग दो-तिहाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करती हैं । ग्रुप ऑफ ट्वेंटी का कोई स्थायी सचिवालय या कर्मचारी नहीं है। इसके बजाय, ग्रुप ऑफ ट्वेंटी की अध्यक्षता सदस्यों के बीच प्रतिवर्ष बदलती रहती है। ग्रुप ऑफ ट्वेंटी की अध्यक्षता अन्य सदस्यों के परामर्श से और वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों के अनुसार ग्रुप ऑफ ट्वेंटी के एजेंडे को एक साथ लाने के लिए ज़िम्मेदार है । निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए, अध्यक्षता को वर्तमान, निकट पूर्व और अगले मेज़बान देशों से बनी एक "त्रयी" द्वारा समर्थित किया जाता है। ---समाप्त---