पीलीभीत के माधोटांडा क्षेत्र स्थित बूंदीभूड़ गांव में शराब की दुकान का विरोध कर रही महिलाओं पर लाठीचार्ज के मामले में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश राम किशोर की अदालत ने तत्कालीन प्रशासनिक और पुलिस अमले की मनमानी पर नाराजगी जताते हुए कलीनगर के एसडीएम, तहसीलदार समेत कई अधिकारियों के खिलाफ 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करने का सख्त निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने माधोटांडा थानाध्यक्ष को आदेश दिया है कि तत्काल मुकदमा दर्ज कर उसकी रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए।
धरने पर हुआ था लाठीचार्ज
मामला बूंदीभूड़ गांव में मंदिर और स्कूल के पास खुली देसी शराब की दुकान का है। ग्रामीण और महिलाएं लंबे समय से आबादी के बीच से इस दुकान को हटाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे। आरोप है कि मौके पर पहुंचे प्रशासनिक और पुलिस अमले ने ग्रामीणों की समस्या सुनने के बजाय सीधे बल प्रयोग शुरू कर दिया। देखते ही देखते निहत्थी महिलाओं पर लाठियां भांज दी गईं। भगदड़ में महिलाओं के कपड़े फट गए, कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े और भारी हंगामा खड़ा हो गया।
पड़ोसी राज्य में कराया था मेडिकल
घटना के बाद पीड़ितों का आरोप था कि स्थानीय प्रशासन के दबाव के चलते घायल महिलाओं को जिले के सरकारी अस्पताल में प्राथमिक इलाज और मेडिकल जांच तक की सुविधा नहीं मिलने दी गई। लाठीचार्ज में लहूलुहान हुई महिलाओं को लेकर बेबस परिजन पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के खटीमा पहुंचे। वहां के सरकारी अस्पताल में सभी घायलों का उपचार हुआ और मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें लाठियों की गहरी चोटों की पुष्टि हुई। इसके बाद न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया।
कोर्ट का 24 घंटे का अल्टीमेटम
अदालत में पेश बयानों और खटीमा अस्पताल के मेडिकल कागजातों को देखकर न्यायाधीश ने पूरे मामले को बेहद गंभीर माना। कोर्ट ने कलीनगर के तत्कालीन एसडीएम प्रमेश कुमार, तहसीलदार वीरेंद्र कुमार, आबकारी निरीक्षक दीपक कुमार, नायब तहसीलदार अक्षय कुमार, राजस्व निरीक्षक और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ 24 घंटे के भीतर सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने का फरमान सुनाया। अदालत के इस सख्त आदेश के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
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