बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र के सेंजना गांव में भारी बारिश के बाद पानी निकासी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा रूप लेता जा रहा है। 28 सितंबर को हुई इस घटना में गांव निवासी किसान भूपेंद्र सिंह के खेत में बारिश का पानी भर गया था, जिससे फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई थी। खेत में डूबी फसल को बचाने के लिए भूपेंद्र सिंह पहले से गड़े निकासी पाइप के जरिए पानी बाहर निकाल रहे थे। इसी बीच पड़ोसी खेत स्वामी दर्जनों लोगों के साथ मौके पर आ धमका और पानी रोकने की नीयत से जबरन पाइप उखाड़ने लगा। जब भूपेंद्र सिंह और उनके परिजनों ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी और पूरे परिवार को जान से मारने की खुली धमकी देने लगे।p
तहरीर के तीन दिन बाद भी कार्रवाई नहीं
घटना के तुरंत बाद पीड़ित किसान ने अनूप सिंह, पलविंदर सिंह, अमरीक सिंह, प्रभजोत सिंह, पिंटू सिंह और 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ कोतवाली में नामजद तहरीर देकर कार्रवाई की गुहार लगाई थी। इसके बावजूद तीन दिन बीत जाने पर भी कोतवाली पुलिस ने न तो आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया और न ही मौके पर जाकर कोई कानूनी जांच शुरू की। पुलिस के इस टालमटोल वाले रवैये से पीड़ित किसान और उसका परिवार दहशत में है। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस जानबूझकर पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल रही है, जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।

खतौनी और जमीन खरीद-फरोख्त में फर्जीवाड़ा
पानी निकासी के इस बवाल के बाद बेशकीमती जमीन की खरीद-फरोख्त का एक बड़ा खेल भी सामने आ गया है। पीड़ित किसान भूपेंद्र सिंह ने इस पूरे मामले की शिकायत पहले ही शासन के प्रमुख सचिव (राजस्व विभाग) से भी की थी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जिस जमीन के आधार पर दूसरा पक्ष दबंगई दिखा रहा है, वह सरकारी रिकॉर्ड में गाटा संख्या 210 (क्षेत्रफल 0.6840 हेक्टेयर) विनीता पत्नी रामजीलाल और गाटा संख्या 246 (क्षेत्रफल 2.9370 हेक्टेयर) दर्शन कुमार पुत्र परमानंद के नाम दर्ज है। लेकिन जमीन पर दावा करने वाले लोग आज तक असली भू-स्वामी विनीता और दर्शन कुमार को सामने नहीं ला सके हैं, न ही इन नाम के किसी व्यक्ति का गांव के परिवार रजिस्टर या वोटर लिस्ट में कोई पता है। किसान ने आशंका जताई है कि किसी अज्ञात व्यक्ति की फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर इस जमीन का गैरकानूनी बैनामा कराया जा रहा है।
अफसरों से निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित का आरोप है कि भूमाफिया फर्जी वारिस और फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस जमीन को अवैध तरीके से हड़पने की फिराक में हैं और इसी दम पर गांव में दहशत फैला रहे हैं। न्याय न मिलने से परेशान किसान ने आला अधिकारियों और शासन को पत्र भेजकर 28 सितंबर की नामजद तहरीर के आधार पर तुरंत मुकदमा दर्ज करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही विवादित जमीन की संदिग्ध खतौनी, रजिस्ट्री और फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी की गहराई से उच्चस्तरीय जांच कराकर फर्जी दस्तावेज रद्द करने की मांग की गई है।
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