मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में बुधवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को दोषी करार दे दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि दोनों ने मिलकर पूरी साजिश के तहत सौरभ की जान ली और फिर सबूत मिटाने के लिए शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की। अदालत ने इस मामले में सजा सुनाने के लिए 15 दिन बाद की तारीख तय की है। फैसला आते ही कोर्ट परिसर में मौजूद सौरभ के परिजनों की आंखें छलक आईं। सौरभ की मां, भाई और बुआ इंसाफ की आस में सुबह से ही अदालत में डटे हुए थे। फैसले के बाद सौरभ की मां ने भरे गले से कहा कि उनके बेटे के हत्यारों को सिर्फ और सिर्फ फांसी की सजा मिलनी चाहिए, तभी सौरभ की आत्मा को शांति मिलेगी। उन्होंने मुस्कान की बेटी का जिक्र करते हुए साफ कहा कि वह बच्ची साहिल की है और अब उनका उससे कोई नाता नहीं है।

​मुस्कान और साहिल की जेल में बढ़ी बेचैनी

​फैसले की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही थी, जेल की सलाखों के पीछे बंद मुस्कान और साहिल की घबराहट बढ़ती जा रही थी। जेल सूत्रों के मुताबिक मुस्कान पिछले तीन दिनों से लगातार पूजा-पाठ में जुटी थी और अपनी सलामती की दुआएं मांग रही थी। दूसरी तरफ साहिल का हाल भी बुरा था। उसने बैरक में साथी बंदियों से पूरी तरह बातचीत बंद कर दी थी। वह दिन भर गुमसुम बैठा रहता और जब भी कोई जेल कर्मचारी उधर से गुजरता, उससे फैसले को लेकर सवाल पूछने लगता। दोनों के चेहरों पर आने वाले अंजाम का डर साफ नजर आ रहा था।

​ड्रम में मिला था सौरभ का शव


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​यह सनसनीखेज वारदात 3 मार्च 2025 को सामने आई थी। मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर सौरभ को रास्ते से हटाने का खौफनाक प्लान बनाया। दोनों ने सौरभ की बेरहमी से हत्या की और पहचान मिटाने के लिए शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। इसके बाद उन्होंने शव के हिस्सों को एक बड़े ड्रम में भरकर छिपा दिया। वारदात के करीब 15 दिन बाद पुलिस ने कड़ियां जोड़ते हुए दोनों को धर दबोचा और जेल भेज दिया। जुलाई 2025 में जिला जज की अदालत में इस खौफनाक मर्डर केस का ट्रायल शुरू हुआ। पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर कोर्ट में 1,000 पन्नों की मजबूत चार्जशीट दाखिल की थी।

​परिजनों ने लड़ी इंसाफ की लंबी लड़ाई

​अदालत में यह कानूनी लड़ाई बेहद मजबूती से लड़ी गई। पूरे मामले में 126 तारीखें पड़ीं, जिनमें अभियोजन पक्ष ने 22 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज कराए। दोनों पक्षों की लंबी और तीखी बहसों के बाद 19 सितंबर को अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को जैसे ही कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया, पीड़ित परिवार को इंसाफ की पहली मंजिल मिल गई। अब पूरे शहर की निगाहें 15 दिन बाद आने वाले अदालत के उस फैसले पर टिकी हैं, जिसमें तय होगा कि इस रोंगटे खड़े कर देने वाले जुर्म की क्या सजा मिलेगी।

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