वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची उथल-पुथल का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जारी अस्थिरता के बीच घरेलू तेल कंपनियों ने एक बार फिर आम आदमी को महंगाई का तगड़ा झटका दिया है। बीते दस दिनों से भी कम समय के भीतर यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। इस लगातार हो रहे इजाफे ने मध्यम और निम्न वर्ग के बजट को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। लोग सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक अपनी लाचारी व्यक्त कर रहे हैं और कह रहे हैं कि आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया होने के इस दौर में सचमुच महंगाई डायन बनकर जनता को खाए जा रही है। ईंधन के दामों में आए इस ताजा उछाल के बाद देश के लगभग सभी महानगरों में पेट्रोल और डीजल के भाव रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गए हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी होने और आने वाले दिनों में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के दाम और अधिक बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
दस दिनों में तीसरी बार लगा बड़ा झटका
राजधानी दिल्ली समेत देश के तमाम बड़े शहरों में ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में सत्तासी पैसे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद अब यहां एक लीटर पेट्रोल के लिए लोगों को निन्यानवे रुपये इक्यावन पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। वहीं डीजल भी इक्यानवे पैसे महंगा होकर बाइस रुपये उनचास पैसे प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं, जहां पेट्रोल की कीमत में नब्बे पैसे का इजाफा हुआ है और नया रेट एक सौ आठ रुपये उनचास पैसे प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में डीजल के दाम भी चौरानवे पैसे बढ़ गए हैं, जिससे अब यह पचानवे रुपये दो पैसे प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। पूर्वी भारत के सबसे बड़े महानगर कोलकाता में इस बार पेट्रोल पर चौरानवे पैसे बढ़ाए गए हैं, जिससे वहां कीमत एक सौ दस रुपये चौंसठ पैसे प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल पचानवे पैसे की बढ़त के साथ सतानवे रुपये दो पैसे प्रति लीटर पर पहुंच गया है। दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में भी उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिली है, वहां पेट्रोल बयासी पैसे की तेजी के साथ एक सौ पांच रुपये इकतीस पैसे और डीजल सत्तासी पैसे की बढ़त के साथ छियानवे रुपये नब्बे पैसे प्रति लीटर पर बिक रहा है।
कुछ ही दिन पहले भी बढ़े थे दाम
इस ताजा बढ़ोतरी से ठीक पहले भी उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना करना पड़ा था, जब मंगलवार को तेल कंपनियों ने कीमतों में बड़ा बदलाव किया था। उस दौरान दिल्ली में पेट्रोल सत्तानवे रुपये सतहत्तर पैसे से बढ़कर निन्यानवे रुपये चौंसठ पैसे और डीजल नब्बे रुपये सरसठ पैसे से बढ़कर निन्यानवे रुपये अट्ठावन पैसे प्रति लीटर हो गया था। मुंबई में भी उस समय पेट्रोल इक्यानवे पैसे महंगा होकर एक सौ सात रुपये उनसठ पैसे और डीजल चौरानवे पैसे बढ़कर चौरानवे रुपये आठ पैसे प्रति लीटर पहुंच गया था। चेन्नई और कोलकाता में भी स्थिति ऐसी ही थी, जहां मंगलवार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्रमशः बयासी पैसे और छियानवे पैसे तक की वृद्धि की गई थी। लगातार हो रही इस वृद्धि के कारण अब आम नागरिकों के लिए निजी वाहनों का उपयोग करना बेहद खर्चीला साबित हो रहा है। जानकारों का मानना है कि डीजल की कीमतों में इस तरह लगातार हो रही वृद्धि से देश में लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन की लागत काफी बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर बाजार में मिलने वाली हरी सब्जियों, दूध, फल और राशन सामग्री पर पड़ेगा। आम जनता का कहना है कि वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है, लेकिन सुबह उठते ही पेट्रोल और डीजल के बढ़े हुए दाम उनके पूरे महीने के गणित को बिगाड़ देते हैं।
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