उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुए दर्दनाक हादसे के तीन दिन बाद भी राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। 13 अगस्त की शाम करीब 6:30 से 7 बजे के बीच मायापुर-पीपलकोटी क्षेत्र में टीएचडीसी की सुरंग में यह हादसा उस वक्त हुआ, जब दूसरी शिफ्ट के श्रमिक अंदर काम में जुटे थे। अचानक भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा टनल के भीतर आ गया, जिससे वहां मौजूद 22 मजदूर फंस गए। जिला प्रशासन और राहत एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दर्जनों श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।
मृतकों की संख्या में बढ़ोतरी
शुक्रवार तक इस हादसे में सात श्रमिकों की मृत्यु की पुष्टि हुई थी। हालांकि, शनिवार को टनल के भीतर से एक और लापता श्रमिक का शव बरामद कर लिया गया, जिसके बाद इस घटना में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। बचाव दल अब भी सुरंग के भीतर फंसे अन्य दो लापता श्रमिकों की तलाश में जी-जान से जुटे हुए हैं। टनल के भीतर का दृश्य बेहद भयावह है, जहां कई फीट तक पानी और गाद भरी हुई है।
चुनौतियों से जूझती रेस्क्यू टीम
सुरंग के भीतर जमा भारी पानी और मलबा राहत-बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। पानी के स्तर को कम करने के लिए उच्च क्षमता वाले बड़े पंप लगाए गए हैं। अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, भारतीय सेना, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें जुटी हुई हैं। मलबा हटाकर रास्ता बनाने और पानी निकालने का काम एक साथ चल रहा है ताकि टनल के उस हिस्से तक पहुंचा जा सके, जहां अंतिम दो श्रमिकों के होने की संभावना है।
जांच के कड़े निर्देश
आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने घटनास्थल का दौरा कर बचाव कार्यों की समीक्षा की और स्पष्ट किया कि जब तक अंतिम श्रमिक की खोज नहीं हो जाती, अभियान रुकने वाला नहीं है। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि सुरक्षा मानकों में कहां चूक हुई और टनल के भीतर अचानक इतना पानी तथा मलबा कैसे प्रवेश कर गया।
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