संसद सत्र के दौरान आज परिसर में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। एक ओर जहां विपक्षी दलों ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर पैलेट गन और बल प्रयोग किए जाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने अयोध्या राम मंदिर में हुए ‘चढ़ावा चोरी’ के मामले को लेकर सरकार के खिलाफ अनोखा और आक्रामक प्रदर्शन किया।
छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर तीखे सवाल
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने सवाल उठाया कि राजधानी दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे शांतिपूर्ण छात्रों और युवाओं पर पैलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल आखिर किसने और किसके आदेश पर करवाया? चूंकि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए विपक्ष ने सीधे तौर पर इसकी जिम्मेदारी तय करने और गृह मंत्रालय से जवाब देने की मांग की है। सदन के भीतर भी इस मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते कार्यवाही बाधित हुई।
‘चंदा चोरी’ के आरोपों पर सपा का अनोखा प्रदर्शन
संसद परिसर में मकर द्वार के सामने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, सांसद डिंपल यादव और अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद समेत कई अन्य सांसद हाथों में स्टील की दान पेटियां (दानपात्र) और ‘चंदा चोर गद्दी छोड़’ लिखी तख्तियां लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे।
सपा नेताओं ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के दान और चढ़ावे में हुई कथित हेराफेरी व चोरी के मामले को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा। अखिलेश यादव ने सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी (SIT) जांच पर सवाल उठाते हुए इसे महज एक खानापूर्ति करार दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो सरकार और सत्ता में बैठे लोग भगवान के मंदिर का दानपात्र और करोड़ों राम भक्तों की आस्था नहीं बचा सके, वे देश के युवाओं का भविष्य और पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं को कैसे रोक पाएंगे? सपा सांसदों ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे भ्रष्टाचार में बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है।
राजनीतिक सरगर्मी तेज
संसद के अंदर और बाहर विपक्ष के इस आक्रामक रुख से साफ है कि मानसून सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के पास कई तीखे हथियार हैं। एक तरफ जहां युवा और शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ धार्मिक एवं आस्था से जुड़े आर्थिक भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाकर विपक्ष ने सियासी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। आगामी चुनावों और राजनीतिक नफा-नुकसान के लिहाज से इन दोनों ही मुद्दों पर आने वाले दिनों में और अधिक घमासान देखने को मिल सकता है।
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