भारतीय मीडिया के इतिहास में एक और ऐसा अध्याय जुड़ गया है, जिसे पत्रकारिता की 'आजादी का सरेंडर' कहा जा रहा है। मामला मध्य प्रदेश के कद्दावर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और NDTV के वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी के बीच हुए विवाद से जुड़ा है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर अब तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में एक कवरेज के दौरान जब NDTV के रिपोर्टर अनुराग द्वारी ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जनहित के सवाल पूछे, तो मंत्री जी अपना आपा खो बैठे। उन्होंने सवालों का जवाब देने के बजाय पत्रकार को सार्वजनिक रूप से "घंटा" और "फोकट की बातें मत करो" कहकर अपमानित किया। सत्ता के अहंकार को दर्शाने वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया।
भड़ास4मीडिया और अभिषेक बैनर्जी का तीखा हमला
मीडिया जगत की हलचलों पर नजर रखने वाली वेबसाइट 'भड़ास4मीडिया' पर लिखते हुए अभिषेक बैनर्जी ने इस घटनाक्रम पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इसे भारतीय मीडिया की रीढ़ के टूटने का सबूत बताया है।
अभिषेक बैनर्जी लिखते हैं:
"हम ऐसे देश में रह रहे हैं जहाँ एक न्यूज़ चैनल अपने ही पत्रकार के उस ट्वीट को डिलीट कर देता है, जिसमें दिखाया गया था कि सत्ता पक्ष का एक नेता उससे सवाल पूछने पर किस तरह मौखिक हमला कर रहा है। अपने रिपोर्टर के साथ खड़े होने के बजाय चैनल चुप्पी चुनता है और प्रेस की आज़ादी की जगह सत्ता की हिफ़ाज़त करता है।"
उन्होंने आगे इसे 'क्रोनी कैपिटलिज़्म' (साठगांठ वाली पूंजीवाद) का असर बताते हुए कहा कि तथाकथित 'न्यू इंडिया' में अब पत्रकारिता के साहस की जगह सत्ता से नजदीकी ने ले ली है। उनका इशारा साफ था कि NDTV के वर्तमान मालिकाना हक (अडानी समूह) के कारण चैनल अब अपने ही पत्रकारों की गरिमा की रक्षा करने में अक्षम साबित हो रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा— “सब चंगा सी!”
मोहम्मद ज़ुबैर का खुलासा और 'अडानी टीवी' का तमगा
फैक्ट-चेकर और मीडिया विश्लेषक मोहम्मद ज़ुबैर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर सबूतों के साथ जानकारी साझा की है। ज़ुबैर के मुताबिक, NDTV ने पहले तो विजयवर्गीय द्वारा अनुराग द्वारी को "घंटा और फोकट" कहे जाने वाली खबर और वीडियो को पोस्ट किया, लेकिन बाद में रहस्यमयी तरीके से उसे डिलीट कर दिया।
इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर NDTV को 'अडानी टीवी' कहकर ट्रोल किया जा रहा है। अभिषेक बैनर्जी ने सीधे तौर पर संजय पुगलिया (अडानी ग्रुप के मीडिया प्रमुख) के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि "एनडीटीवी पतन का दिन प्रतिदिन नया लेवल छू रहा है।"
दांव पर पत्रकारिता की साख
यह मामला केवल एक ट्वीट डिलीट होने का नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे का है जो दर्शक एक संस्थान पर करते हैं। जब एक प्रतिष्ठित संस्थान अपने ही रिपोर्टर के खिलाफ हुए दुर्व्यवहार के सबूत मिटाने लगे, तो सवाल उठना लाजमी है कि क्या अब खबरें 'मालिकाना हक' और 'सत्ता के समीकरण' देखकर तय की जा रही हैं?
फिलहाल, इस पूरे विवाद पर न तो कैलाश विजयवर्गीय की ओर से कोई नया स्पष्टीकरण आया है और न ही NDTV ने आधिकारिक तौर पर यह बताया है कि उन्होंने अपने रिपोर्टर का साथ देने के बजाय वीडियो डिलीट करना क्यों चुना।
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