वर्ल्ड डेस्क (उत्तराखण्ड तहलका): पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री व PTI प्रमुख इमरान खान के जेल में कत्ल होने की अफवाहों ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। अब सोशल मीडिया पर यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि अगस्त 2023 से जेल में बंद इमरान खान को 17 दिन पहले ही फांसी दी जा चुकी है, जिसकी वजह से पूरे पाकिस्तान में एक जबरदस्त हंगामा खड़ा हो गया है।
हालात इतने भयानक हैं कि शहबाज शरीफ के करीबी तक ने इमरान के फातिहा पढ़ने की नसीहत दे दी है, जिससे समर्थकों का गुस्सा और भड़क उठा है। हालांकि, जेल अधिकारियों ने इन अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए गुरुवार को एक बयान जारी कर पुष्टि की है कि PTI प्रमुख इमरान खान सुरक्षित हैं और उन्हें सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं।

PTI प्रमुख की ये की मौत की अफवाहें ऐसे समय में उड़ी हैं जब उन्हें लंबे समय से सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। आखिरी बार उन्हें डेढ़ साल पहले देखा गया था। दो महीने पहले उनकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी होनी थी, लेकिन न तो उनका चेहरा दिखाई दिया और न ही उनकी आवाज़ सामने आई। उनकी बहनों को भी पिछले एक महीने से उनसे मिलने नहीं दिया गया, जिसके बाद उनकी बहनों ने जेल के बाहर धरना दिया और पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाया। उनकी बहनें और बेटे कासिम खान ने सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त की है और PTI प्रमुख की सलामती का प्रमाण मांगा है।
इस पूरे घटनाक्रम में, जिस एक व्यक्ति का नाम बार-बार सामने आ रहा है, वह हैं पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर। इमरान समर्थकों का आरोप है कि 27वें संविधान संशोधन के बाद मुनीर की शक्तियां बेहिसाब बढ़ चुकी हैं, और वह देश के सबसे बड़े फैसले लेने की स्थिति में हैं।

खबरें बताती हैं कि इस विवादास्पद संशोधन ने मुनीर को आजीवन फील्ड मार्शल बना दिया है और उन्हें अभियोजन से आजीवन प्रतिरक्षा प्रदान की है, जिससे उनकी शक्ति अभूतपूर्व रूप से केंद्रित हो गई है। समर्थकों का मानना है कि यह पाकिस्तानी एस्टैब्लिशमेंट (Pakistani Establishment) की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। पाकिस्तानी एस्टैब्लिशमेंट पर अक्सर राजनेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगता रहा है, जिसका पुराना इतिहास 1979 में पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी दिए जाने से जुड़ा है।
यह भी पढ़ें: लखीमपुर खीरी: गुरुद्वारा के Sikh सेवादारों की पगड़ी उतारने पर बवाल, 5 आरोपी गिरफ्तार
हालांकि, जेल अधिकारियों और PTI के कुछ नेताओं ने भी इन दावों को गलत बताया है और कहा है कि व जेल में पूरी तरह स्वस्थ हैं। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तो यहाँ तक दावा किया है कि खान को फाइव-स्टार होटल से भी बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। वहीं, PTI के पूर्व सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने इन अफवाहों को अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के बीच गलत सूचना की "जैसे को तैसा" वाली रणनीति बताया है।
इन सब के बावजूद, पाकिस्तानी एस्टैब्लिशमेंट के खिलाफ लोगों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है, और इमरान खान की सुरक्षा और पारदर्शिता की मांग पूरे पाकिस्तान में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। जब तक इमरान खान सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आते या उनके स्वास्थ्य की कोई स्पष्ट और विश्वसनीय तस्वीर जारी नहीं की जाती, तब तक उनकी सलामती को लेकर रहस्य बना रहेगा।
---समाप्त---