रुद्रपुर के गंगापुर मार्ग स्थित शैलजा फार्म में वर्षों से जमा अवैध कब्जे को उखाड़ फेंकने के लिए नगर निगम प्रशासन ने पूरी तैयारी के साथ धावा बोला। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच जब शहर सो रहा था, तब नगर आयुक्त शिप्रा जोशी पाण्डेय और सहायक नगर आयुक्त राजू नबियाल के नेतृत्व में निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गई। देखते ही देखते पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया और आसमान में उड़ते ड्रोन कैमरों ने चप्पे-चप्पे पर नजर रखनी शुरू कर दी। यह कार्रवाई उस अवैध साम्राज्य के खिलाफ थी, जिसे बाबा बालक राम ने धार्मिक गतिविधियों की आड़ में धीरे-धीरे खड़ा कर लिया था। सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाई गई झोपड़ियों और अवैध निर्माणों को जेसीबी मशीनों ने कुछ ही घंटों में मलबे के ढेर में बदल दिया।
बाबा की बाधा और पुलिस की सख्ती
जैसे ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई, कब्जाधारक बाबा बालक राम ने अपने समर्थकों के साथ टीम का रास्ता रोकने की कोशिश की। उन्होंने सरकारी कार्य में बाधा डालने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन कानून के आगे उनकी एक न चली। मौके पर तैनात कोतवाल मनोज रतूड़ी और ट्रांजिट कैम्प थाना प्रभारी मनोज पाण्डे ने तत्परता दिखाते हुए बाबा को तुरंत हिरासत में ले लिया और कोतवाली भेज दिया। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से गंगापुर मुख्य मार्ग से जुड़ने वाले सभी संपर्क रास्तों को रस्सियों से सील कर दिया गया था ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति कार्रवाई में खलल न डाल सके।
घेराबंदी और सरकारी स्वामित्व की घोषणा
मलबे को साफ करने के बाद नगर आयुक्त ने तुरंत उस 6 एकड़ बेशकीमती भूमि को सुरक्षित करने के आदेश दिए। नगर निगम के कर्मचारियों ने बिना समय गंवाए टीन शेड लगाकर पूरी जमीन की हदबंदी कर दी। मौके पर नगर निगम के स्वामित्व का बोर्ड लगा दिया गया ताकि भविष्य में दोबारा कोई इस पर नजर न डाल सके। अधिकारियों ने बताया कि इस भूमि का डेटाबेस अब डिजिटल रूप से सुरक्षित कर लिया गया है और आने वाले समय में यहां जनहित से जुड़ी बड़ी विकास योजनाओं को आकार दिया जाएगा। पूरी कार्रवाई के दौरान वीडियोग्राफी कराई गई ताकि किसी भी प्रकार के झूठे आरोपों या कानूनी पेचीदगियों से बचा जा सके।
ठिठुरती गाय के लिए पिघला अधिकारियों का दिल
इस कठोर प्रशासनिक कार्रवाई के बीच एक बेहद भावुक कर देने वाला दृश्य भी सामने आया। जब बुलडोजर एक झोपड़ी को गिराने की ओर बढ़ रहा था, तभी वहां एक गाय और उसके पांच बछड़े मिले। भीषण ठंड और भूख के कारण गाय की स्थिति अत्यंत दयनीय थी, वह ठंड से अकड़ जाने के कारण हिलने की स्थिति में भी नहीं थी। बेजुबान की यह हालत देख नगर आयुक्त शिप्रा जोशी खुद भावुक हो उठीं। उन्होंने तत्काल ध्वस्तीकरण रुकवाया और खुद खड़े होकर गाय के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का इंतजाम कराया। निगम के दर्जनों कर्मचारियों ने बड़ी मशक्कत के बाद उस बेसुध गाय को सुरक्षित ट्रॉली में लादा और बछड़ों के साथ पास की गौशाला भिजवाया, जहां उनके इलाज और चारे की समुचित व्यवस्था की गई।
अलाव की तपिश में चलता रहा ऑपरेशन
आसमान से गिरते पाले और हाड़ कंपा देने वाली ठंड ने इस पूरे अभियान को प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना दिया था। सुबह के वक्त पारा गिरने से मौके पर खड़े होना भी दूभर हो रहा था, लेकिन टीम के हौसले पस्त नहीं हुए। स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों ने फार्म परिसर में ही मौजूद सूखी लकड़ियों और झाड़ियों को एकत्र किया और तीन अलग-अलग स्थानों पर अलाव जलाए। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी और निगम के कर्मचारी बारी-बारी से अलाव की तपिश लेकर खुद को गर्म करते रहे और अपना काम जारी रखा। दोपहर होते-होते सालों पुराना अवैध कब्जा पूरी तरह साफ हो चुका था और करोड़ों की सरकारी जमीन अब निगम के नियंत्रण में थी।
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