देवभूमि की जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है और न्याय की मांग को लेकर आक्रोश की ज्वाला बुझने का नाम नहीं ले रही है। इसी कड़ी में रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए एक विशाल कैंडल मार्च का आयोजन किया। ट्रांजिट कैंप व्यापार मंडल के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसका नेतृत्व पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया। हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां और आंखों में न्याय की उम्मीद लिए प्रदर्शनकारियों ने ट्रांजिट कैंप कोतवाली के पास स्थित राधा-कृष्ण मंदिर से शिवनगर के चामुंडा मंदिर तक मार्च निकाला। इस दौरान वातावरण अंकिता के हत्यारों को फांसी देने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग वाले नारों से गूंजता रहा।
कथित ऑडियो खुलासे ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सबसे तीखा प्रहार पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने किया। उन्होंने हाल ही में चर्चा में आए उस कथित ऑडियो का जिक्र किया, जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है। ठुकराल ने कहा कि पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के बीच हुई बातचीत में जिस तरह से 'वीआईपी' के नाम का संकेत मिला है, उसने जनता के मन में गहरे संदेह पैदा कर दिए हैं। उन्होंने सीधा सवाल उठाया कि आखिर वह रसूखदार व्यक्ति कौन है जिसे बचाने की कोशिश की जा रही है? ठुकराल ने धामी सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार अपनी छवि को साफ-सुथरा रखना चाहती है और खुद को इस विवाद से अलग करना चाहती है, तो उसे बिना किसी देरी के केंद्र सरकार से इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश करनी चाहिए।
वीआईपी का चेहरा बेनकाब होने तक जारी रहेगा संघर्ष
व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव गुप्ता ने जनता की भावनाओं को स्वर देते हुए कहा कि अंकिता भंडारी केवल एक परिवार की सदस्य नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड की बेटी थी। उसकी निर्मम हत्या ने समाज के हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उस रहस्यमयी 'वीआईपी' का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाता और उसे सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि न्याय में देरी होना न्याय न मिलने के बराबर है। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में मांग की कि इस मामले की तह तक जाकर उन तमाम चेहरों को बेनकाब किया जाए जिन्होंने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया या इसे संरक्षण प्रदान किया। यह कैंडल मार्च केवल एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उन सत्ताधारी शक्तियों के खिलाफ एक सामूहिक हुंकार थी जो सच को दबाने का प्रयास कर रही हैं।
इस कैंडल मार्च में विकास बंसल, ललित बिष्ट, रजत गुप्ता, केरू मंडल, रामकुमार गुप्ता, सोनू सक्सेना, अनूप, कुलदीप गंगवार, राहुल, जयप्रकाश प्रजापति, गौरव दीक्षित, बाबू राम प्रजापति, हरपाल, राजकुमार, योगेंद्र, राकेश अधिकारी, जितेंद्र राठौर, अरविंद गंगवार, कमलदीप सोनकर, सजीव लाला, रविंद्र गुप्ता, मनोज वर्मा, अनिल गुप्ता, यक्ष गुप्ता, राकेश कोली, विजेंद्र पाल, सुरजीत, संजय कुमार, सुरजीत गुप्ता, उमा सरकार, सचिन, सुमित गुप्ता, सुरजीत शर्मा, प्रीति साना, मोनिका ढाली सहित सैकड़ों की संख्या में क्षेत्रवासी और व्यापार मंडल के पदाधिकारी मौजूद रहे।