उत्तराखंड में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त अभियान ने अब सत्तापक्ष के कद्दावर नेताओं की दहलीज पर दस्तक दे दी है। ताजा और सबसे बड़ा मामला गदरपुर विधानसभा के गूलरभोज क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ भाजपा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे के आवास पर प्रशासन ने बेदखली का नोटिस चस्पा कर दिया है। राजस्व विभाग की इस औचक और कड़ी कार्रवाई से पूरे प्रदेश के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रशासनिक प्रहार
तहसीलदार कार्यालय द्वारा जारी यह नोटिस माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल में दायर जनहित याचिका संख्या 192/2024 (सुनील यादव बनाम उत्तराखंड सरकार) के क्रम में पारित आदेशों के अनुपालन में दिया गया है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार, ग्राम गुलरभोज के खाता संख्या 64 और खसरा संख्या 12ग (रकबा 0.158 हेक्टेयर) की भूमि 'नयी परती' (श्रेणी 5-1) के रूप में दर्ज है। जांच में पाया गया कि इस बेशकीमती सरकारी जमीन पर विधायक अरविंद पांडे पुत्र वीरेंद्र पांडे द्वारा अवैध रूप से पक्का निर्माण कर कब्जा किया गया है। यह भूखंड दो रास्तों के मध्य स्थित है और इसके एक किनारे से सिंचाई की महत्वपूर्ण नहर बहती है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।
मुश्किलों के चक्रव्यूह में घिरे विधायक
उल्लेखनीय है कि अरविंद पांडे के लिए मुश्किलें एक के बाद एक बढ़ती ही जा रही हैं। अभी हाल ही में दो स्थानीय पीड़ितों ने सार्वजनिक मंचों पर आकर उन पर अपनी निजी जमीन पर जबरन कब्जा करने के संगीन आरोप लगाए थे। उन मामलों की आंच अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब सीधे सरकारी जमीन के मामले में प्रशासन की इस सीधी कार्रवाई ने विधायक की चारों तरफ से घेराबंदी कर दी है। एक समय में प्रदेश सरकार के सबसे रसूखदार मंत्रियों में शुमार रहे अरविंद पांडे के खिलाफ अपनी ही सरकार के कार्यकाल में हुई इस कार्रवाई को धामी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
15 दिन की मोहलत और बुलडोजर का साया
उपजिलाधिकारी (SDM) के निर्देशानुसार जारी इस नोटिस में विधायक को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है ताकि वे स्वयं अपना अवैध पक्का निर्माण हटा लें। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित अवधि में जमीन कब्जा मुक्त नहीं की गई, तो प्रशासन नियमानुसार बलपूर्वक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा, जिसका हर्जाना और खर्च भी विधायक से ही वसूला जाएगा। फिलहाल, विधायक खेमे में इस कार्रवाई को लेकर गहरा सन्नाटा पसरा है और उनके समर्थकों के बीच भारी गहमागहमी और चिंता देखी जा रही है। हर किसी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या 15 दिन बाद प्रशासन का बुलडोजर इस वीआईपी अतिक्रमण पर चलेगा?
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