जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा हालात एक बार फिर से गंभीर चिंताओं के घेरे में आ गए हैं। शुक्रवार की शाम दक्षिणी कश्मीर के संवेदनशील कुलगाम जिले से एक दहला देने वाली खबर सामने आई, जहां संदिग्ध चरमपंथियों ने कायराना हरकत को अंजाम देते हुए दो निर्दोष प्रवासी मजदूरों को अपना निशाना बनाया। इस अचानक हुई गोलीबारी ने एक बार फिर से घाटी में काम कर रहे बाहरी मजदूरों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मारे गए दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और अपनी रोजी-रोटी की तलाश में कश्मीर आए थे।
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना कुलगाम के केलम इलाके में स्थित एक ईंट-भट्ठे पर घटी। शाम के वक्त जब मजदूर अपने दैनिक कार्य में व्यस्त थे या आराम कर रहे थे, तभी अचानक अज्ञात हमलावर वहां पहुंचे और ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। इस खौफनाक हमले में एक मजदूर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय पुलिस प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि इस आतंकी हमले में जान गंवाने वालों की पहचान दीपक रात्रे और भूपिंदर के रूप में की गई है।
हमले के तुरंत बाद मची अफरा-तफरी और अंधेरे का फायदा उठाकर हमलावर मौके से फरार होने में कामयाब रहे। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों के भारी दल ने तुरंत घटनास्थल का रुख किया। पूरे इलाके को चारों तरफ से सील कर दिया गया है और फरार आतंकवादियों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर एक सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, इस सनसनीखेज वारदात के बाद से जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है और न ही अभी तक किसी भी आतंकवादी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, लेकिन खुफिया एजेंसियां हर पहलू की गहराई से जांच कर रही हैं।
उपराज्यपाल ने दिए आतंकवादियों के सफाए के कड़े निर्देश
इस दर्दनाक घटना के बाद से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस कायरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात और अन्य शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ इस सुरक्षा चूक पर उच्चस्तरीय बैठक की है और मौजूदा हालात की समीक्षा की है।
उपराज्यपाल ने अपने आधिकारिक पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने हमारे सुरक्षा बलों को अपने खुफिया तंत्र को मजबूत करने, एंटी-टेरर ऑपरेशन को और अधिक तेज करने तथा इन आतंकवादियों को चुन-चुनकर खत्म करने का सख्त निर्देश दिया है। प्रशासन का यह रुख साफ संकेत देता है कि घाटी में शांति को बाधित करने वाले तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
घाटी में लगातार बढ़ रही सुरक्षा चुनौतियां
गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों से दक्षिण कश्मीर में सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर हमलों की वारदातों में इजाफा देखा गया है। इसी महीने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में अज्ञात बंदूकधारियों ने एक अन्य बड़ी घटना को अंजाम देते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन को गोली का शिकार बनाया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। वह पूरी वारदात पास लगे एक सीसीटीवी कैमरे में साफ-साफ कैद हो गई थी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई थी। बडगाम जिले के मूल निवासी आशिक हुसैन की शहादत के बाद अब कुलगाम में प्रवासी मजदूरों पर हुआ यह हमला इस बात का गवाह है कि सुरक्षा एजेंसियां कितनी बड़ी चुनौती का सामना कर रही हैं। आम नागरिकों और मजदूरों को निशाना बनाए जाने की इन घटनाओं ने घाटी के प्रवासी समुदाय के बीच एक बार फिर से डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
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