देश में आम उपभोक्ताओं की जेब पर एक बार फिर महंगाई का भारी बोझ पड़ता दिखाई दे रहा है। चीनी, सरसों तेल, रिफाइंड, पाम ऑयल और दैनिक उपयोग के मसालों समेत जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। थोक बाजारों में बढ़ी हुई कीमतों का सीधा असर अब खुदरा किराना दुकानों और स्थानीय मंडियों में देखने को मिल रहा है। पश्चिमी एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव और रुपये के मूल्यह्रास के कारण माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है, जिससे आयातित खाद्य तेलों की लागत में काफी वृद्धि हुई है।

​खाद्य तेलों के बाजार पर नजर डालें तो सरसों, सोयाबीन और पाम तेल की कीमतों में बीते कुछ समय के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। भारत अपनी खाद्य तेलों की कुल आवश्यकता का लगभग साठ प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आई किसी भी रुकावट या जहाजरानी किराए में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। इसके अलावा, बायोफ्यूल नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिलहन उत्पादों के डायवर्जन और कमजोर आयात के चलते भी रिफाइंड व पाम तेल के खुदरा भाव ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं।

​दूसरी तरफ, चीनी और मसालों की कीमतों में भी तेजी का रुख बना हुआ है। एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के बढ़ते इस्तेमाल और मौसम संबंधी अनिश्चितताओं के कारण चीनी के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका से बाजार में कीमतें चढ़ी हुई हैं। जीरा, हल्दी और काली मिर्च जैसे प्रमुख मसालों की आवक सीमित रहने और त्योहारों से पहले बढ़ती मांग के चलते इनके थोक भाव में बढ़त दर्ज की गई है। किराना कारोबारियों का कहना है कि थोक मंडियों से सामान महंगा मिलने की वजह से उन्हें खुदरा ग्राहकों तक दाम बढ़ा कर पहुंचाने पड़ रहे हैं।

​रसोई के इस बढ़ते बजट का सबसे बड़ा झटका मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को लग रहा है। रोजमर्रा की जरूरत वाली खाद्य वस्तुओं के महंगे होने से अन्य घरेलू खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति में स्थिरता नहीं आती और घरेलू स्तर पर नई फसलों की आवक सुचारू नहीं होती, तब तक खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव बना रह सकता है।


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बजट बिगड़ने के कारण आम जनता अब एक महीने का राशन एक साथ खरीदने के बजाय सीमित मात्रा में खरीदारी कर रही है。महंगाई को काबू में रखने और त्योहारी सीजन में आम लोगों की जेब पर बोझ न पड़ने देने के लिए सरकार द्वारा खाद्य तेल व चीनी की कीमतों की समीक्षा की जा रही है

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