भारत के सर्राफा बाजार के लिए कल की सुबह एक ऐसी खबर लेकर आई जिसने निवेशकों और आम आदमी दोनों के होश उड़ा दिए। केंद्र सरकार ने एक कड़ा फैसला लेते हुए सोने और चांदी पर लगने वाले आयात शुल्क में अचानक बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। अब तक सोने के आयात पर प्रभावी शुल्क 6 प्रतिशत लगता था जिसे अब बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी इस अधिसूचना ने न केवल ज्वेलरी उद्योग को चौंकाया है बल्कि घरेलू बाजार में भी हलचल तेज कर दी है। सरकार के इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी वजह देश के बढ़ते व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और वैश्विक अस्थिरता के कारण भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा था। ऐसी स्थिति में सरकार के पास गैर-जरूरी आयातों पर लगाम लगाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था।
उम्मीद से ज्यादा बढ़ा सोने का आयात
इस फैसले के पीछे का आर्थिक तर्क बेहद गहरा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का सोने का आयात बिल उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़कर 72 अरब डॉलर के पार चला गया था। भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और यहां की मांग का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करके पूरा किया जाता है। जब भारत बड़े पैमाने पर सोना खरीदता है तो उसे इसके बदले भारी मात्रा में डॉलर का भुगतान करना पड़ता है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आती है और रुपया कमजोर होता है। सरकार का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ने से सोने की मांग में कमी आएगी जिससे डॉलर की बचत होगी। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ा दी है और ऐसी स्थिति में सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए रक्षात्मक मुद्रा में आ गई है। प्रधानमंत्री ने भी हाल ही में संकेत दिए थे कि देश की आर्थिक मजबूती के लिए कुछ समय के लिए सोने जैसे विलासिता वाले निवेशों से बचना जरूरी है।
आयात शुल्क बढ़ने से बाजार में मचा कोहराम
जैसे ही आयात शुल्क बढ़ने की खबर बाजार में फैली, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोने की कीमतों में आग लग गई। कीमतें कुछ ही मिनटों में 6 प्रतिशत तक उछल गईं और देखते ही देखते अपर सर्किट लग गया। सर्राफा बाजारों में सन्नाटा पसरा है क्योंकि अचानक बढ़ी कीमतों ने ग्राहकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। ज्वेलरी शोरूम के मालिकों का कहना है कि शादी-ब्याह के सीजन में इस तरह का फैसला उनके व्यापार के लिए बड़ा झटका है। हालांकि कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि शुल्क बढ़ने से देश में सोने की तस्करी बढ़ सकती है। जब वैध रास्ते से सोना लाना महंगा हो जाता है तो अवैध रास्तों का इस्तेमाल बढ़ जाता है जो सुरक्षा और राजस्व दोनों के लिए बड़ी चुनौती पेश करता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय उपभोक्ता सोने के प्रति अपना मोह छोड़ पाते हैं या फिर यह मांग बनी रहेगी और व्यापार घाटे पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
---समाप्त---