रावलपिंडी, पाकिस्तान (उत्तराखण्ड तहलका): पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan के परिवार पर दबाव की राजनीति के बीच, उनकी बहन अलीमा खान को हाल ही में रावलपिंडी की एंटी-टेररिज्म कोर्ट (ATC) के आदेश पर हिरासत में ले लिया गया है। यह कार्रवाई 2023 के डी-चौक प्रदर्शनों और जेल के बाहर हुए अन्य विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में उनकी लगातार गैर-हाज़िरी के कारण की गई है। इस घटना ने पूरे पाकिस्तान, खासकर रावलपिंडी में, एक बार फिर गहरा सियासी तनाव पैदा कर दिया है।

​जेल के बाहर मची अफरा-तफरी

​अलीमा खान की हिरासत की कार्रवाई एक नाटकीय घटनाक्रम के बाद हुई। मंगलवार की रात, रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद Imran Khan की हत्या की अफवाह तेजी से फैली। इस अफवाह ने आग में घी का काम किया और अलीमा खान अपनी दो अन्य बहनों के साथ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के हजारों समर्थकों को लेकर तुरंत जेल के बाहर पहुंचीं।

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​उनकी मुख्य मांग थी कि परिवार को Imran Khan से मिलने की तुरंत अनुमति दी जाए ताकि वे उनके सुरक्षित होने की पुष्टि कर सकें। इस दौरान, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई। अलीमा खान और उनकी बहनों ने पुलिस पर दुर्व्यवहार करने और उन्हें घसीटते हुए हटाने का गंभीर आरोप लगाया है।


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​ATC का सख्त आदेश

​अलीमा खान पहली बार अप्रैल 2023 में तब सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने Imran Khan से मुलाकात न मिलने के विरोध में जेल के बाहर धरना दिया था। उस समय उन्हें हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में वारंट रद्द कर दिए गए थे।

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​लेकिन, उनके खिलाफ मामलों की सुनवाई जारी रही। एंटी-टेररिज्म कोर्ट (ATC) ने उनकी लगातार अनुपस्थिति को केस की सुनवाई में बाधा बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। कई समन भेजने के बावजूद पेश न होने पर, अदालत ने नॉन-बिलियेबल वारंट जारी किए, जिसके आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया।

​'राजनीतिक प्रतिशोध' का आरोप

​PTI नेताओं और खान परिवार ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताया है। उनका सीधा आरोप है कि सरकार Imran Khan और उनके परिवार पर दबाव बनाने के लिए उन्हें निशाना बना रही है।

​वहीं, सरकार और पुलिस प्रशासन का तर्क है कि कार्रवाई पूरी तरह से कानून के दायरे में और न्यायिक आदेशों का पालन करते हुए की गई है। अलीमा खान की गिरफ्तारी ने पाकिस्तान में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बढ़ते टकराव को और हवा दे दी है। विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से Imran Khan की रिहाई की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों में और अधिक तेज़ी आने की संभावना है।

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