देहरादून, (उत्तराखण्ड तहलका): ​राज्य के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने प्रदेशभर में Smart Meter लगाने की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। ये Smart Meter, जिन्हें एक तरह से बिजली खपत के लिए प्रीपेड ATM की तरह माना जा रहा था, लगने के बाद से ही लगातार ओवर-बिलिंग और तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतों से घिरे हुए थे। ​जानकारी के अनुसार, UPCL ने उपभोक्ताओं की तमाम शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है।

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​एमडी अनिल कुमार ने लिया संज्ञान

प्रदेश में 16 लाख से अधिक पुराने मीटरों को हटाकर Smart Meter लगाने का काम चल रहा था, जिसमें अब तक लगभग 3 लाख मीटर लगाए जा चुके हैं। लेकिन, इन नए मीटरों के लगने के बाद से ही उपभोक्ता शिकायत कर रहे थे कि उनका बिजली का बिल बेवजह अधिक आ रहा है। इसके अलावा, मीटर में अन्य प्रकार की तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतें भी मिल रही थीं।

​मामले की गंभीरता को देखते हुए, UPCL के एमडी अनिल कुमार ने इसका तत्काल संज्ञान लिया। निदेशक परिचालन कार्यालय की ओर से मुख्य अभियंता गढ़वाल, बीएमएस परमार, ने आदेश जारी किए, जिसमें स्पष्ट किया गया कि उपभोक्ताओं से मिल रही शिकायतों के कारण Smart Meter लगाने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।


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शिकायतों के निवारण के लिए लगेंगे मेगा कैंप

​UPCL के एमडी अनिल कुमार ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए बताया कि अब पहले सभी शिकायतों का समाधान किया जाएगा, जिसमें नए कनेक्शन पर मीटर लगाना और पुराने खराब मीटर बदलना भी शामिल है। ​उन्होंने घोषणा की कि Smart Meter संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए उपखंड स्तर तक विशेष "मेगा कैंप" लगाए जाएंगे। इन कैंपों में मीटर लगाने वाली कंपनी के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे, ताकि समस्याओं का मौके पर ही त्वरित समाधान किया जा सके।

सभी मुख्य अभियंताओं को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित शिकायतों का निस्तारण सुनिश्चित करें और इस संबंध में ऊर्जा निगम मुख्यालय को अवगत कराएं। इस फैसले से उन हजारों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है, जो ATM की तरह रीचार्ज होने वाले इन नए Smart Meter से जुड़ी बिलिंग समस्याओं से जूझ रहे थे।

Smart Meter पर आमतौर पर सामने आने वाली प्रमुख शिकायतें

Smart Meter को लेकर उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में उपभोक्ताओं की ओर से कुछ सामान्य शिकायतें सामने आई हैं। इन शिकायतों ने अक्सर उपभोक्ताओं के मन में अविश्वास पैदा किया है, जिसके कारण ही UPCL को यह रोक लगानी पड़ी है।

​1. तेज रीडिंग और अत्यधिक बिल (Overbilling)

  • शिकायत: यह सबसे आम और मुख्य शिकायत है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर पुराने मीटरों की तुलना में बहुत तेज चलते हैं, जिससे उनकी बिजली की खपत में कोई बदलाव न होने पर भी बिल की राशि अचानक 20% से 50% तक बढ़ जाती है।
  • संभावित कारण: कई बार मीटर का अनुचित कैलिब्रेशन, या फिर उच्च संवेदनशीलता (High Sensitivity) के कारण छोटी-छोटी लीकेज या उपकरणों के स्टैंडबाय मोड में रहने वाली बिजली खपत को भी अधिक सटीकता से रिकॉर्ड करना।

​2. तकनीकी त्रुटियाँ और मीटर का बंद हो जाना (Technical Glitches)

  • शिकायत: कई मामलों में Smart Meter में अचानक तकनीकी खराबी आ जाती है या वे डिस्प्ले दिखाना बंद कर देते हैं। प्री-पेड मोड में बैलेंस होने के बावजूद भी बिजली कट जाने की शिकायतें भी सामने आती हैं।
  • संभावित कारण: खराब मौसम (बारिश, नमी), वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, या संचार मॉड्यूल (Communication Module) में दिक्कत आना।

​3. अचानक बिजली का कटना (Disconnection Issues)

  • शिकायत: Smart Meter, विशेषकर प्री-पेड मोड वाले, बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के या बकाया राशि को लेकर बहुत कम समय दिए जाने पर बिजली काट देते हैं। कई बार तकनीकी कारणों से भी गलत समय पर बिजली काट दी जाती है।
  • संभावित कारण: यह एक ऑटोमेटिक फीचर है, लेकिन सही समय पर डेटा सिंक्रनाइज़ न होने या उपभोक्ता तक समय पर सूचना न पहुँचने से समस्या होती है।

​4. डेटा सुरक्षा और निजता की चिंता (Data Privacy)

  • शिकायत: उपभोक्ता अपनी बिजली खपत के डेटा को लगातार ट्रैक किए जाने को लेकर चिंतित रहते हैं। यह डेटा उनकी व्यक्तिगत जीवनशैली और व्यवहार को दर्शा सकता है।
  • संभावित कारण: स्मार्ट मीटर हर 15 मिनट या आधे घंटे में रीडिंग भेजते हैं, जिससे उपभोक्ता की निजता पर सवाल उठते हैं।

​5. मीटर बदलने की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव

  • शिकायत: उपभोक्ताओं को पुराने मीटर के हटाए जाने और नए स्मार्ट मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया के दौरान रीडिंग के सत्यापन या किसी टेस्टिंग रिपोर्ट की प्रति नहीं दी जाती। इससे उन्हें लगता है कि उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया जाएगा।

​इन सभी शिकायतों को देखते हुए, UPCL का यह फैसला एक समीक्षात्मक विराम (Review Pause) के तौर पर देखा जा सकता है, जो परियोजना को उपभोक्ताओं के लिए अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा। UPCL का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ताओं को पहले उनकी समस्याओं का समाधान मिले, उसके बाद ही आगे की मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू हो।

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