नई दिल्ली (उत्तराखण्ड तहलका): भारत के अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करने वाला चीन (China) अब नेपाल बॉर्डर पर बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। इसके मद्देनज़र, चीन ने नेपाल बॉर्डर के क़रीब अपनी मिलिट्री एक्टिविटी काफ़ी बढ़ा दी है। तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन के ऊबड़-खाबड़ झोंगा काउंटी में ऊँचाई पर स्थित कुनमुजिया आउटपोस्ट पर चीनी सैनिक अपनी ऑपरेशनल स्पीड तेज़ कर रहे हैं।

​यह जगह चीन-नेपाल बॉर्डर के बहुत नज़दीक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत बॉर्डर पर अपनी सैन्य तैयारियों को मज़बूत करने की चीन की कोशिशों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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​नेपाल बॉर्डर पर China मिलिट्री मूवमेंट में तेज़ी

​रेजोनेंट न्यूज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, झोंगा काउंटी में चीनी सैनिक बड़ी संख्या में मौजूद हैं और कई तरह की सघन मिलिट्री एक्टिविटी कर रहे हैं। हाल ही में जारी एक चीनी मिलिट्री वीडियो में दर्शाया गया है कि नेपाल बॉर्डर के पास चीनी आउटपोस्ट पर पेट्रोल पॉइंट्स का एक बड़ा नेटवर्क स्थापित किया गया है। इनमें से कई रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पॉइंट्स 5,000 मीटर से भी ज़्यादा ऊँची बर्फ़ से ढकी चोटियों पर मौजूद हैं। ये ऊँची जगहें नीचे की ज़रूरी घाटियों और दर्रों पर बेमिसाल निगरानी क्षमता प्रदान करती हैं।


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​मुश्किल इलाके के लिए "तीन-तरफ़ा" पेट्रोल सिस्टम

​मुश्किल इलाके और कठोर मौसम के हिसाब से ढलने के लिए, China की सेना ने एक नया और प्रभावी "तीन-तरफ़ा" पेट्रोल सिस्टम अपनाया है। इस सिस्टम के तहत, मौसम के हिसाब से प्रशिक्षित सैनिकों द्वारा पारंपरिक पैदल पेट्रोलिंग की जाती है। इसके अलावा, ख़ास हाई-मोबिलिटी ऑल-टेरेन यूनिट्स का इस्तेमाल करके गाड़ियों से जासूसी की जाती है, और ड्रोन का उपयोग करके लगातार हवाई निगरानी भी की जाती है। यह बहुआयामी तरीक़ा पूरी कवरेज सुनिश्चित करता है, यहाँ तक कि कड़ाके की सर्दियों के महीनों में भी जब ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता है और भारी बर्फ़बारी से इलाका अलग-थलग पड़ जाता है।

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​पूरे बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर पर China की नज़र

​कुनमुजिया चीन (China) के लिए महज़ एक सर्विलांस पोस्ट नहीं, बल्कि उसके सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर का एक ज़रूरी हिस्सा है। नेपाल के साथ चीन की 1,414 किलोमीटर लंबी सीमा पर इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। झोंगा काउंटी में लगातार बर्फबारी के बीच बनी यह पोस्ट, चीन की अपने बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने की कोशिशों को दर्शाती है। इसके ज़रिए, चीन ग्यिरोंग (रासुवागढ़ी) और तातोपानी जैसे ज़रूरी क्रॉसिंग पॉइंट्स के साथ-साथ कुनमुजिया ट्रेड रूट और माइग्रेशन रूट्स की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करता है।

​नेपाल की ज़मीन पर China का अतिक्रमण

​यह सैन्य जमावड़ा ऐसे समय में सामने आया है जब चीन (China) पर नेपाल की ज़मीन हड़पने के आरोप हैं। नेपाल के कृषि मंत्रालय द्वारा 2022 में जारी किए गए दस्तावेज़ों में बताया गया था कि चीन ने उत्तरी नेपाल बॉर्डर पर 10 जगहों पर 36 हेक्टेयर ज़मीन पर अतिक्रमण कर लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, 2016 में, चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने नेपाल के एक ज़िले में जानवरों के पालन-पोषण के लिए एक वेटेरिनरी सेंटर भी स्थापित किया था। चीन ने नेपाल के 15 बॉर्डर ज़िलों में से सात से ज़्यादा ज़िलों—दोलखा, गोरखा, दारचुला, हुमला, सिंधुपालचौक, संखुवासा और रसुवा—में ज़मीन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है।

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