हमीरपुर/इलाहाबाद (उत्तराखण्ड तहलका): उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह 'किसान' के करीब डेढ़ महीने से लापता होने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक (SP) हमीरपुर को 8 दिसंबर 2025 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर सफाई देने का आदेश दिया है।

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​कोर्ट ने यह निर्देश इसलिए दिया है क्योंकि प्रीतम सिंह 'किसान' (लापता व्यक्ति) को, जिनके अवैध हिरासत में होने का आरोप है, अभी तक बरामद नहीं किया जा सका है।

​क्या है पूरा मामला?

​प्रीतम सिंह 'किसान' हमीरपुर के एक वरिष्ठ BJP नेता हैं और पूर्व में जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। यह पूरा मामला 18-19 अक्टूबर 2025 की रात हमीरपुर के राठ थाना क्षेत्र स्थित उनके पेट्रोल पंप पर हुए विवाद से शुरू हुआ था:


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विवाद और फायरिंग: 18 अक्टूबर की रात प्रीतम सिंह 'किसान' के पेट्रोल पंप पर कुछ युवकों से ऑनलाइन भुगतान (Online Payment) को लेकर विवाद और मारपीट हुई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आत्मरक्षा में प्रीतम सिंह ने अपनी लाइसेंसी राइफल से कथित तौर पर हवाई फायर भी किया था। इस घटना में दूसरे पक्ष के कुछ लोगों को चोटें आई थीं।

पुलिस हिरासत का आरोप: घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को पूछताछ के लिए राठ कोतवाली ले गई। ​लापता होने का रहस्य: पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच थाने में समझौता हो गया था और प्रीतम सिंह 'किसान' को उनके बेटे की सुपुर्दगी में दे दिया गया था, जिसके बाद वह अपने घर चले गए थे। हालांकि, प्रीतम सिंह के परिजनों (खासकर भाई, जो पेशे से अधिवक्ता हैं) का आरोप है कि पुलिस उन्हें थाने ले गई थी और उसके बाद से ही वह लापता हैं। परिजनों ने पुलिस पर प्रीतम सिंह को अवैध रूप से हिरासत (Illegal Detention) में रखने और गायब करने का गंभीर आरोप लगाया है। हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका: परिजनों ने पुलिस के दावे को खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) दायर की। ​पुलिस की कार्रवाई: हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने प्रीतम सिंह की तलाश में उनके आवास और पेट्रोल पंप पर न्यायिक अधिकारी की मौजूदगी में कई बार तलाशी ली, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। लापता होने के करीब 28 दिन बाद (17 नवंबर 2025 को) एसपी ने कार्रवाई करते हुए राठ कोतवाल को लाइन हाजिर भी कर दिया था।

​हाईकोर्ट का सख्त रुख

एसपी को तलब: जस्टिस जेजे मुनीर की बेंच ने सुनवाई के दौरान लापता व्यक्ति की बरामदगी न होने पर नाराजगी जताई और एसपी हमीरपुर को 8 दिसंबर 2025 को व्यक्तिगत हलफनामा (Personal Affirmation) के साथ कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। यह भी पढ़ें: स्कूल बस हादसे में 7 वर्षीय अनाबिया की मौत: मिल्टन एकेडमी पर लापरवाही का आरोप, जानें क्या हैं अनिवार्य नियम? याचिका बदलने का संकेत: कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि अगर पुलिस लापता नेता को बरामद नहीं कर पाती है, तो इस बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को एक आपराधिक रिट याचिका या किसी अन्य एजेंसी को सौंपे जाने वाले एक अलग आपराधिक मामले में बदला जा सकता है। चेतावनी: कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा, "यदि एसपी हमीरपुर अपना पक्ष नहीं रखते हैं, तो उन्हें बाद में पछताना पड़ सकता है।"

​कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस आदेश को 24 घंटे के भीतर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) हमीरपुर के माध्यम से एसपी हमीरपुर तक पहुंचाया जाए। मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2025 को होगी।

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