बिलासपुर। मिल्टन एजुकेशनल एकेडमी, बिलासपुर के स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही ने एक परिवार की खुशियाँ उजाड़ दी हैं। गुरुवार शाम स्कूल बस से उतरने के तुरंत बाद उसी बस ने दो सगी बहनों को रौंद दिया, जिसमें कक्षा एक की छात्रा अनाबिया (7) की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसकी छोटी बहन जन्नत (4) घायल हो गई। इस हृदय विदारक हादसे ने एक बार फिर स्कूल बसों के संचालन में बरती जाने वाली लापरवाही और बच्चों की सुरक्षा के प्रति स्कूल प्रशासन की उदासीनता को उजागर किया है।

मामला नगर के ​मोहल्ला भट्टी टोला का है। मोहल्ला निवासी बारदाना व्यापारी मोहम्मद आरिफ की बेटियां अनाबिया और जन्नत छुट्टी के बाद स्कूल बस से घर से 10 कदम की दूरी पर मोड़ पर उतरी थीं। परिजनों ने बताया कि बस से उतरकर दोनों बहनें हाथ पकड़कर घर की ओर चलने लगीं, तभी ड्राइवर ने बच्चों के पूरी तरह सुरक्षित होने की पुष्टि किए बिना बस आगे बढ़ा दी। बस का पिछला पहिया अनाबिया के सिर पर चढ़ गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हुई और अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। वहीं बस चालक मौके से फरार हो गया।

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दुर्घटना ​स्कूल प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा 

​यह दुर्घटना सीधे तौर पर स्कूल प्रबंधन की लापरवाही का परिणाम है। सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशानिर्देशों के बावजूद, बच्चों के परिवहन के दौरान अनिवार्य सुरक्षा नियमों की घोर अनदेखी की गई है। अगर केयर टेकर/परिचर अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाता तो अनाबिया आज ज़िंदा होती। ​यह विडंबना है कि बिलासपुर में पूर्व में हुए स्कूल बस हादसों के बावजूद प्रशासन सुरक्षा नियमों के क्रियान्वयन को लेकर निष्क्रिय बना रहता है। हर हादसे के बाद जाँच की बात होती है, लेकिन कठोर कार्रवाई के अभाव में लापरवाही जारी रहती है।


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​स्कूल बसों के लिए सबसे महत्वपूर्ण नियम है:

केयर टेकर/परिचर (Care Taker/Attendant) का होना अनिवार्य है, खासकर प्राथमिक बच्चों के लिए। केयर टेकर का काम यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे सुरक्षित रूप से उतरें और सड़क पार करें।

सरकारी नियम हवा-हवाई: क्या परिवहन विभाग भी जिम्मेदार?

​इस हादसे के बाद परिवहन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि विभाग की कथित मिलीभगत के चलते स्कूल नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हैं। बसों की फिटनेस, स्पीड गवर्नर और सीसीटीवी जैसे अनिवार्य सुरक्षा मानकों पर ध्यान नहीं दिया जाता।

स्कूल बसों के लिए कुछ अनिवार्य सुरक्षा नियम:

  1. महिला परिचर: प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए बस में प्रशिक्षित महिला परिचर का होना अनिवार्य है।
  2. बस स्टॉप प्रोटोकॉल: ड्राइवर को बच्चों के पूरी तरह उतरकर सुरक्षित रूप से सड़क पार करने तक इंतजार करना होता है।
  3. स्पीड गवर्नर: बस की गति सीमा नियंत्रित करने के लिए स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए।
  4. फिटनेस और पहचान: बस का वैध फिटनेस प्रमाण पत्र, पीला रंग और 'स्कूल बस' स्पष्ट रूप से लिखा होना अनिवार्य है।

हादसों के बाद जागता है प्रशासन और कानूनी प्रक्रिया

​यह विडंबना है कि बिलासपुर में पूर्व में हुए स्कूल बस हादसों के बावजूद प्रशासन सुरक्षा नियमों के क्रियान्वयन को लेकर निष्क्रिय बना रहता है। हर हादसे के बाद जाँच की बात होती है, लेकिन कठोर कार्रवाई के अभाव में लापरवाही जारी रहती है।

स्कूल और ड्राइवर पर कानूनी कार्रवाई:

​दूसरी बच्ची के भविष्य को देखते हुए भले ही परिजनों ने फिलहाल कोई औपचारिक तहरीर न दी हो, पुलिस को इस मामले में आपराधिक लापरवाही के तहत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

ड्राइवर: भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304A (लापरवाही से मृत्यु) और 337/338 (घायल करना) के तहत मामला दर्ज हो सकता है। ​स्कूल प्रबंधन: यदि जांच में यह स्थापित होता है कि स्कूल प्रबंधन ने अनिवार्य सुरक्षा नियमों, जैसे केयर टेकर की व्यवस्था, की घोर अनदेखी की, तो उसे भी लापरवाही और आपराधिक षड्यंत्र के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

​सीसीटीवी फुटेज में दर्दनाक हादसा रिकॉर्ड

वहीं, घटना की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि दोनों बहने हाथ पकड़कर सड़क पार कर रही थीं। मोड़ पर बस मुड़ते हुए दोनों को कुचलते हुए निकल गई। पुलिस और परिवहन विभाग को अब केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि स्कूल बसों की नियमित और सख्त जाँच सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य मासूम को लापरवाही की कीमत जान गंवाकर न चुकानी पड़े।

 मामले में कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक बलवान सिंह ने बताया कि अभी घटना की कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। मिलते ही विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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