हल्द्वानी के गौलापार स्थित देवभूमि होटल में देर रात हुई एक भयावह घटना ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है। काशीपुर के पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह ने मानसिक तनाव की चरम सीमा पर पहुंचकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह केवल एक आत्महत्या नहीं बल्कि उस व्यवस्था की नाकामी है जहां एक अन्नदाता करोड़ों की धोखाधड़ी का शिकार होकर न्याय की गुहार लगाते-लगाते थक गया। नैनीताल की वादियों में परिवार के साथ सुकून के पल तलाशने आए सुखवंत को क्या पता था कि यह उनकी आखिरी यात्रा होगी। जमीन के सौदे में हुई करोड़ों की जालसाजी ने उनके दिमाग में ऐसा घाव किया था जो परिवार के प्यार से भी नहीं भर सका।

मौत से पहले का वो खौफनाक संघर्ष

घटनाक्रम की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुखवंत ने अपनी पत्नी प्रदीप कौर और 12 वर्षीय मासूम बच्चे के सामने ही मौत का सामान निकाल लिया था। कमरे के भीतर जिंदगी और मौत के बीच काफी देर तक जद्दोजहद चलती रही। पत्नी और बच्चे ने अपनी जान पर खेलकर सुखवंत के हाथ से हथियार छीनने की कोशिश की लेकिन वे असफल रहे। जब बेबस परिवार मदद के लिए होटल के स्वागत कक्ष की ओर भागा तभी एक गूंज ने सब कुछ खत्म कर दिया। सुखवंत ने अपनी कनपटी पर गोली मारकर खुद को मौत की नींद सुला दिया। मौके पर पहुंची पुलिस को केवल खून से लथपथ शव मिला।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने खोली व्यवस्था की पोल

मरने से पहले सुखवंत सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया जो अब पुलिस प्रशासन के लिए गले की फांस बन चुका है। इस वीडियो में उन्होंने काशीपुर के एक संगठित गिरोह का कच्चा चिट्ठा खोला है। सुखवंत के मुताबिक अमरजीत सिंह, गुरविंदर, आशीष और जाहिर हुसैन जैसे लोगों ने उन्हें बक्सौरा में सात एकड़ जमीन दिखाकर चार करोड़ रुपये ऐंठ लिए और बाद में किसी दूसरी बंजर जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम कर दी। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि सुखवंत ने इस बाबत उधम सिंह नगर के कप्तान से भी गुहार लगाई थी लेकिन उन्हें न्याय की जगह केवल आश्वासन ही मिले।

खाकी की भूमिका और भविष्य की जांच पर सवाल

सुखवंत सिंह पर भी पूर्व में कुछ मुकदमे दर्ज थे लेकिन उनकी आत्महत्या ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पुलिस की सुस्ती ने उन्हें मौत के करीब धकेला? मृतक के पिता ने अब आरोपियों के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस फिलहाल दो मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित है। पहला यह कि सुखवंत के पास वह अवैध हथियार कहां से आया जिससे उन्होंने खुद को गोली मारी और दूसरा यह कि वीडियो में नामजद आरोपियों ने किस कदर उन्हें प्रताड़ित किया था। एक किसान का इस तरह सरेआम सिस्टम को कोसते हुए मौत को गले लगाना शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा धब्बा है।


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