राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर बुधवार की रात एक बार फिर भारी हंगामे का गवाह बना। रात करीब आठ बजे प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ जारी आंदोलन के बीच स्थिति फिर तनावपूर्ण हो गई। इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक अचानक हुई झड़प के रूप में नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध कार्रवाई के अंदेशे के तौर पर भी देखा जा रहा है। दरअसल, बुधवार शाम से ही जिस बड़े पैमाने पर जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जा रही थी, उससे प्रदर्शनकारियों के बीच यह अंदेशा गहराने लगा था कि प्रशासन रात के अंधेरे में इस आंदोलन को जबरन खत्म कराने की तैयारी में है। इस आशंका को तब और बल मिला जब आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी कर सार्वजनिक तौर पर यह चिंता जताई कि पुलिस देर रात छात्रों के धरना स्थल को खाली करा सकती है।

​इसी डर और आशंका के माहौल के बीच जंतर-मंतर के बाहर सुरक्षाबलों ने बेहद सख्त घेराबंदी कर दी। धरना स्थल को चारों तरफ से कड़े बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया, जिससे बाहर से आ रहे छात्रों और समर्थकों का अंदर प्रवेश पूरी तरह बंद हो गया। बाहर लगातार जमा हो रही भीड़ और रास्ता खोले जाने की मांग को लेकर पुलिस के साथ तीखी बहस शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति को संभालने के नाम पर जैसे ही पुलिस की ओर से कड़ा रुख अपनाते हुए लाठीचार्ज किया गया, वैसे ही प्रदर्शनकारियों का आक्रोश फूट पड़ा। छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण माहौल में अचानक हुए बल प्रयोग की वजह से स्थिति नियंत्रित होने के बजाय और बिगड़ गई।

​लाठीचार्ज के बाद भड़का जनआक्रोश, पुलिस अफसर समेत कई लोग हुए जख्मी

​पुलिसिया कार्रवाई और जबरन खदेड़े जाने की कोशिशों के बाद उग्र हुई भीड़ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सीधी धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिसमें कुछ गुस्साए युवाओं ने पुलिसकर्मियों के डंडे तक छीन लिए। देखते ही देखते पूरा क्षेत्र रणक्षेत्र में बदल गया और दोनों तरफ से जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान हुई पत्थरबाजी में पंजाबी बाग क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त जय प्रकाश के माथे पर गंभीर चोट आई और वे घायल हो गए। इसके साथ ही पुलिस के लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की वजह से कई छात्र भी चोटिल हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स को तुरंत मोर्चा संभालना पड़ा।

​इस घटना के बाद अब प्रशासनिक मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि रात की आड़ में आंदोलन को कुचलने के लिए यह पूरी घेराबंदी की गई थी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की तात्कालिक वजह को लेकर देर रात तक न तो दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी हुआ है और न ही प्रदर्शनकारियों की ओर से कोई विस्तृत लिखित सफाई दी गई है। दोनों पक्षों की ओर से साधी गई इस चुप्पी के कारण जंतर-मंतर पर भ्रम और अविश्वास का माहौल बना हुआ है।


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​तमाम प्रशासनिक बंदिशों और कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से छात्रों के जंतर-मंतर पहुँचने का सिलसिला लगातार जारी है। टॉलस्टॉय मार्ग से लेकर जनपथ तक पूरे इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। फिलहाल मौके पर भारी सुरक्षा बल की गश्त जारी है और स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

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