नई दिल्ली (Uttarakhand Tehelka): देश की राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास हुए हालिया कार धमाके की जांच में सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे 'व्हाइट कॉलर टेरर' Module का भंडाफोड़ किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। इस आतंकी नेटवर्क के तार जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश (यूपी) और हरियाणा तक फैले हुए हैं। अब तक की जांच में 18 से अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं, जिनमें कई पढ़े-लिखे पेशेवर डॉक्टर शामिल हैं। ये डॉक्टर अपनी उच्च शैक्षणिक पृष्ठभूमि और सफेदपोश छवि का इस्तेमाल संदेह से बचने और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कर रहे थे।

​जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह Module पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवात-उल-हिंद से जुड़ा हुआ है। इनका मकसद देश के प्रमुख शहरों और वीआईपी ठिकानों पर बड़े हमले करना था। इस मॉड्यूल के सक्रिय होने का मुख्य केंद्र फरीदाबाद (हरियाणा) स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी बनकर उभरा है।

Shubh

​आतंकी डॉक्टर Module : कौन हैं गिरफ्तार और उनका रोल?

​गिरफ्तार किए गए प्रमुख डॉक्टरों और संदिग्धों की भूमिकाएं गहरी साजिश की ओर इशारा करती हैं:


Advertisement
  1. डॉ. मुजम्मिल शकील गनई (उर्फ मूसाहिब): यह Module का किंगपिन और मुख्य सदस्य माना जा रहा है। मुजम्मिल कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला है। वह फरीदाबाद के धोज़ में एक कमरे में रहता था। एजेंसियों ने उसके ठिकाने से 358 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट सहित कुल 2,900 किलोग्राम विस्फोटक (जिसमें भारी मात्रा में आरडीएक्स भी शामिल होने का संदेह है) और कई घातक हथियार (राइफल, पिस्टल) बरामद किए हैं। वह विस्फोटक भंडारण और वितरण का मास्टरमाइंड था।
  2. डॉ. आदिल अहमद राठर: आदिल अनंतनाग/कुलगाम, कश्मीर का निवासी है और यूपी के सहारनपुर में सक्रिय था। उसने मुजम्मिल के साथ मिलकर विस्फोटक भंडारण और संचालन में सक्रिय रूप से सहयोग किया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि श्रीनगर के जीएमसी मेडिकल कॉलेज के उसके लॉकर से एक AK-47 राइफल बरामद हुई, जो दर्शाता है कि उनका नेटवर्क शैक्षणिक संस्थानों में भी फैला हुआ था।
  3. डॉ. शाहीन शाहिद (सैयद): लखनऊ (यूपी) की रहने वाली डॉ. शाहीन पर जैश की महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात' की महिला कमांडर और भर्ती प्रमुख होने का गंभीर आरोप है। वह उच्च शिक्षित मुस्लिम महिलाओं को कट्टरपंथी बनाकर आतंकी संगठन के लिए भर्ती कर रही थी। उसे मुजम्मिल की कार से हथियार बरामद होने के बाद गिरफ्तार किया गया।
  4. मौलवी इरफान अहमद वागे: कश्मीर के शोपियां का यह मौलवी इस Module के लिए रेडिकलाइजेशन (कट्टरपंथीकरण) का काम कर रहा था। वह मेडिकल छात्रों और युवा डॉक्टरों को जिहाद के नाम पर बरगलाकर आतंकी संगठन में भर्ती करने में अहम भूमिका निभाता था।
  5. डॉ. उमर उल नबी: पुलवामा, कश्मीर का रहने वाला डॉ. उमर दिल्ली कार धमाके का मुख्य संदिग्ध है, जिसे कार चलाते हुए देखा गया था। माना जा रहा है कि वह धमाके में मारा गया है।

यह भी पढ़ें: Delhi ब्लास्ट मामले में मिली कामयाबी: पुलवामा और NCR में भारी मात्रा में विस्फोटक की बरामदगी

​नेटवर्क लिंक और अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन

​जाँच एजेंसियां इस बात की गहन पड़ताल कर रही हैं कि इन डॉक्टरों के बीच कोई संगठित नेटवर्क लिंक था और वे किस तरह से एक-दूसरे को जानते थे। फरीदाबाद, लखनऊ और कश्मीर में हुई एक साथ गिरफ्तारियां बताती हैं कि यह एक आल इंडिया नेटवर्क था।

  • यूपी और हरियाणा: Module ने फरीदाबाद और लखनऊ जैसे गैर-पारंपरिक आतंकी ठिकानों को चुना ताकि वे सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच सकें।
  • इंटरनेशनल लिंक: कुछ गिरफ्तार डॉक्टरों की तुर्की यात्रा और टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से विदेशी हैंडलर्स (संभावित रूप से पाकिस्तान से) से संपर्क होने की जानकारी मिली है। यह संकेत देता है कि यह Module केवल घरेलू नहीं था, बल्कि इसे विदेशी आतंकी संगठनों से साजो-सामान और फंडिंग मिल रही थी।
  • विस्फोटक की मात्रा: 2,900 किलोग्राम विस्फोटक की बरामदगी बताती है कि यह मॉड्यूल किसी बहुत बड़ी तबाही, जैसे मुंबई 26/11 की तरह के सिलसिलेवार धमाकों को अंजाम देने की फिराक में था।

​सुरक्षा एजेंसियां अब इस नेटवर्क की फंडिंग, हथियारों की सप्लाई चेन और अन्य स्लीपर सेल्स की तलाश में जुटी हैं। यह मामला देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आया है, जहां पढ़े-लिखे पेशेवर युवा भी कट्टरपंथी विचारधारा का शिकार हो रहे हैं।

---समाप्त---