नई दिल्ली: बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Red Fort Blast के घायलों का हाल जानने के लिए सीधे LNJP अस्पताल पहुंचे और घायलों का हाल जाना। घटना के वक्त वह अपनी दो दिवसीय भूटान यात्रा पर थे। विपक्ष ने घटना के बाद गृहमंत्री की अनुपस्थिति पर तीखी आलोचना की।
दूसरी ओर, NIA (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) की जांच में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक खतरनाक 'व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल' का खुलासा हुआ है। 10 नवंबर को लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण कार विस्फोट के बाद, देश की राजनीति और सुरक्षा तंत्र में भूचाल आ गया है। यह आतंकी घटना, जिसमें कई लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक लोग घायल हुए, केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।

भूटान से लौटे PM, पहुंचे LNJP अस्पताल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यात्रा समाप्त होते ही सभी प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए, सीधे लोक नायक जयप्रकाश नारायण (LNJP) अस्पताल का रुख किया। उनका यह त्वरित दौरा विपक्ष की आलोचना को निष्क्रिय करने और नेतृत्व की उपस्थिति प्रदर्शित करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
उन्होंने LNJP अस्पताल में लगभग एक घंटा बिताया और घायल हुए 20 से अधिक पीड़ितों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। पीएम मोदी ने पीड़ितों और उनके परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने डॉक्टरों को निर्देश दिया कि घायलों को सर्वोत्तम संभव और निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए। अस्पताल से बाहर आने के बाद, प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में स्पष्ट संदेश दिया कि Red Fort Blast के पीछे जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
Went to LNJP Hospital and met those injured during the blast in Delhi. Praying for everyone’s quick recovery.
Those behind the conspiracy will be brought to justice! pic.twitter.com/HfgKs8yeVp — Narendra Modi (@narendramodi) November 12, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय भूटान यात्रा, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना था, Red Fort Blast की छाया में समाप्त हुई।
दिल्ली सरकार ने मुआवजे का किया ऐलान
इसी बीच, दिल्ली सरकार ने Red Fort Blast के पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता (मुआवजे) की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह घोषणा करते हुए कहा कि मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख की अनुग्रह राशि दी जाएगी। स्थायी रूप से अपंग हुए लोगों को ₹5 लाख दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यह आश्वासन दिया कि सभी घायलों के इलाज का पूरा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी।
विस्फोट की तीव्रता और घायलों की भयावह स्थिति का विवरण
Red Fort Blast में इस्तेमाल किए गए IED की तीव्रता बेहद अधिक थी। विस्फोट के तुरंत बाद, दिल्ली के मुख्य अस्पतालों में घायलों की भीड़ लग गई। LNJP अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन ने घायलों की गंभीर स्थिति का खुलासा किया। डॉक्टरों के अनुसार, यह घटना एक सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि एक उच्च-शक्ति वाले विस्फोटक हमले का स्पष्ट संकेत थी, जिससे कई पीड़ितों के आंतरिक अंग तक प्रभावित हुए हैं।
NIA की जांच में बड़े खुलासे: जैश-ए-मोहम्मद का 'व्हाइट-कॉलर' मॉड्यूल बेनकाब
गृह मंत्रालय के निर्देश पर जांच संभाल चुकी NIA ने इस मामले में कई बड़े खुलासे किए हैं। NIA ने जांच के लिए ADG विजय साखरे के नेतृत्व में एक 10 सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया। NIA की जांच में सबसे बड़ा खुलासा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े एक 'व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल' का हुआ है। इस मॉड्यूल में उच्च-शिक्षित पेशेवर शामिल थे, जो इस Red Fort Blast की साजिश में शामिल थे।
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं यह हमला गणतंत्र दिवस पर लाल किले को निशाना बनाने की विफल रही पिछली साजिश का हिस्सा तो नहीं था। इसके अलावा, हमले में तुर्की (Turkey) के संभावित फंडिंग लिंक को भी खंगाला जा रहा है, जो Red Fort Blast के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को दर्शाता है। सूत्रों के अनुसार, मुख्य संदिग्ध डॉक्टर मॉड्यूल के दो सदस्य, डॉ. उमर (Dr. Umar) और डॉ. मुजम्मिल (Dr. Muzammil) के पासपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि दोनों ने टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ने के तुरंत बाद तुर्की की यात्रा की थी। जाँच एजेंसियों को संदेह है कि यह यात्रा आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) के नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है। कुछ सूत्रों का कहना है कि उनकी मुलाकात तुर्की में जैश के हैंडलरों से हुई थी। आशंका यह भी व्यक्त की जा रही है कि तुर्की यात्रा के दौरान ही उन्हें भारत में आतंकी गतिविधियों को फैलाने और देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय होने के निर्देश दिए गए थे, जिसके तहत उन्होंने फरीदाबाद और सहारनपुर जैसे स्थानों को चुना था। जाँच एजेंसियाँ इस कोण पर गहराई से तफ्तीश कर रही हैं कि क्या उन्होंने तुर्की में कोई प्रशिक्षण लिया था, किसी से मुलाकात की थी, और उन्हें क्या निर्देश मिले थे।यह भी पढ़ें: दिल्ली ब्लास्ट मामले में मिली कामयाबी: पुलवामा और NCR में भारी मात्रा में विस्फोटक की बरामदगी
सुरक्षा चूक पर विशेषज्ञ राय
सुरक्षा विश्लेषकों ने इस घटना को खुफिया विफलता (Intelligence Failure) का एक गंभीर मामला बताया है। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि 'व्हाइट-कॉलर टेरर' का उदय एक नए खतरे का आयाम है, जिसका सामना करने के लिए तकनीकी और मानव खुफिया तंत्र में तत्काल सुधार की आवश्यकता है। Red Fort Blast ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा तंत्र को तत्काल मजबूत करना होगा।
विपक्ष ने उठाए सवाल: गृह मंत्री बिहार में, PM भूटान में
इस आतंकी हमले के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार, विशेषकर गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी पर सुरक्षा चूक को लेकर तीखे हमले किए। विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि देश की राजधानी में इतनी बड़ी आतंकी घटना होने पर गृह मंत्री बिहार विधानसभा चुनावों में व्यस्त थे।
आलोचना करने वाले प्रमुख विपक्षी नेता:
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा मांगते हुए आरोप लगाया कि 'गृह मंत्री चुनावों में व्यस्त हैं और पीएम भूटान में हैं। यह मोदी सरकार की नाकामी है!' कांग्रेस के कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे ने अमित शाह को 'most incompetent Home Minister of independent India' करार दिया और तत्काल इस्तीफे की मांग की।प्रधानमंत्री का त्वरित अस्पताल दौरा, इस राजनीतिक दबाव का एक प्रभावी और मानवीय जवाब माना गया, लेकिन NIA की जांच आगे बढ़ने के साथ, इस Red Fort Blast के दूरगामी राजनीतिक और सुरक्षा प्रभाव पड़ने तय हैं।
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