देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर ऐतिहासिक छात्र आंदोलन का गवाह बना है। सोशल मीडिया के मीम पेजों से शुरू हुआ 'कॉकरोच जनता पार्टी' का सफर अब देश की सड़कों पर एक बड़े आंदोलन के रूप में तब्दील हो चुका है। NEET-UG परीक्षा में हुई धांधली और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की विसंगतियों से नाराज हजारों छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवा नेता अभिजीत दीपके विदेश से लौटते ही सीधे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे, जिससे प्रदर्शनकारियों का उत्साह दोगुना हो गया। मैदान में उमड़ी युवाओं की भारी भीड़ ने व्यवस्था के खिलाफ अपने गुस्से का खुलकर इजहार किया।
मिला दिग्गजों का साथ
इस छात्र आंदोलन को उस समय और अधिक मजबूती मिली जब लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में धरने पर बैठ गए। उन्होंने युवाओं की मांगों को जायज ठहराते हुए शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की वकालत की। छात्रों के इस बढ़ते दबाव को देखते हुए देश की प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने भी आंदोलन को अपना खुला समर्थन दे दिया है। आम आदमी पार्टी, शिवसेना (उद्धव गुट) और वामपंथी दलों के नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए हैं, जिससे यह मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रूप से गरमा गया है।
सरकार को दिया सात दिन का अल्टीमेटम
आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जंतर-मंतर के मंच से घोषणा की गई है कि अगर सात दिनों के भीतर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से नहीं हटाया गया या उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया, तो यह प्रदर्शन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। युवाओं ने चेतावनी दी है कि वे इस आंदोलन को देश के कोने-कोने में फैलाएंगे और हर राज्य में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। नेतृत्वकर्ताओं का साफ कहना है कि अब युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह लड़ाई मुकाम तक पहुंचने से पहले खत्म नहीं होगी।
अपमान से उपजा आंदोलन
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट की एक कथित टिप्पणी के बाद हुई थी, जिसमें युवाओं की तुलना कथित तौर पर कॉकरोच से की गई थी। इस अपमान को युवाओं ने एक चुनौती की तरह लिया और सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी नाम से एक अभियान छेड़ दिया। देखते ही देखते इस डिजिटल पेज से करोड़ों युवा जुड़ गए और इसने एक ऐसे संगठन का रूप ले लिया जो आज सरकार की चूड़ें हिलाने का माद्दा रखता है। डिजिटल दुनिया में स्थापित राजनीतिक दलों को पीछे छोड़ने के बाद अब यह जमीनी आंदोलन देश की राजनीति की दशा और दिशा बदलने की राह पर अग्रसर दिख रहा है।
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