देश की राजधानी दिल्ली में पर्यावरण और अधिकारों की लड़ाई अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। लद्दाख की मांगों को लेकर पिछले तीन हफ्तों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा धरनास्थल से उठाए जाने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम के विरोध में अब कॉकरोच जनता पार्टी भी मुखर होकर सामने आ गई है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के समर्थन में और सरकार के रुख के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने का बड़ा फैसला किया है। इसकी आधिकारिक जानकारी शनिवार सुबह पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल के जरिए सार्वजनिक की गई, जिसने इस पूरे आंदोलन को एक नई दिशा दे दी है।

​पुलिस की कार्रवाई पर सीजेपी का तीखा पलटवार

​दिल्ली पुलिस ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि यह कदम दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशों और डॉक्टरों की सख्त सलाह के बाद उठाया गया है। पुलिस के मुताबिक, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को ध्यान में रखते हुए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, आंदोलनकारियों और उनके समर्थकों के बीच इस कार्रवाई को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। कॉकरोच जनता पार्टी ने पुलिस की इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन माना है। पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर साफ किया गया है कि भले ही पुलिस ने सोनम वांगचुक को धरनास्थल से हटा दिया हो, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा है। पार्टी ने दृढ़ता से कहा है कि आगामी 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च अपने तय समय और कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में अभिजीत दीपके ने भी अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट साझा कर अनशन की पुष्टि की है।

​सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर परिवार की चिंता


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​दूसरी तरफ, अस्पताल प्रशासन और पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई के बीच सोनम वांगचुक के परिवार की ओर से भी एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने उनके स्वास्थ्य और गरिमा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में प्रशासन से अपील की है कि उनके पति की सहमति के बिना उनके मुंह या नसों के जरिए किसी भी प्रकार का कृत्रिम भोजन, तरल पदार्थ या दवा न दी जाए। यह बयान दर्शाता है कि आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर किस हद तक अडिग हैं और वे किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं। सोनम वांगचुक का यह अनशन शनिवार को अपने 21वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

​राजधानी में गहराता राजनीतिक और सामाजिक गतिरोध

​इस पूरे परिदृश्य ने दिल्ली के प्रशासनिक गलियारों में तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया है। एक तरफ जहां सरकार और प्रशासन कानून व्यवस्था तथा स्वास्थ्य का हवाला देकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक कार्यकर्ताओं और नई राजनीतिक ताकतों का गठजोड़ इस आंदोलन को देशव्यापी बनाने में जुट गया है। अभिजीत दीपके का अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में यह विवाद शांत होने के बजाय और ज्यादा उग्र रूप धारण कर सकता है। अब सभी की निगाहें 20 जुलाई को होने वाले मार्च पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह आंदोलन आगे क्या रुख अख्तियार करता है।

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