पटना/नई दिल्ली (उत्तराखण्ड तहलका): बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने प्रचंड जीत हासिल करने के बाद, नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं। सोमवार को निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और इसके साथ ही विधानसभा भंग करने की सिफारिश भी की, जिसके बाद नई सरकार के गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। राजनीतिक गलियारों में गतिविधियां तेज हैं और महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर NDA के घटक दलों, खासकर BJP और JDU, के बीच गहन विचार-विमर्श जारी है।

नेतृत्व का चुनाव और शपथ ग्रहण की तैयारी
नई सरकार के गठन की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम विधायक दल के नेता का चुनाव है।
- बैठकें 19 नवंबर को: भाजपा और जदयू दोनों ने 19 नवंबर को अपने-अपने विधायक दल की बैठकें बुलाई हैं। इन बैठकों में दल अपने-अपने नेता चुनेंगे।
- संयुक्त नेतृत्व: इन बैठकों के तुरंत बाद NDA विधायक दल की संयुक्त बैठक होगी। यह पूरी संभावना है कि इस संयुक्त बैठक में वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही गठबंधन का नेता चुना जाएगा।
- सरकार बनाने का दावा: नेतृत्व चुने जाने के बाद, नीतीश कुमार राज्यपाल के समक्ष NDA के समर्थन पत्रों के साथ बहुमत का दावा पेश करेंगे।
- शपथ ग्रहण (20 नवंबर): नई NDA सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 20 नवंबर को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित किया जाना लगभग तय है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ कई नए कैबिनेट मंत्री भी शपथ लेंगे।
मंत्रालयों और पदों का बंटवारा: सरकार में संतुलन की चुनौती
नई की संरचना को लेकर सबसे अधिक मंथन मंत्रिमंडल के स्वरूप और प्रमुख पदों के बंटवारे पर हो रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष पद पर खींचतान
NDA के भीतर सबसे प्रमुख विवादित बिंदुओं में से एक विधानसभा अध्यक्ष का पद है, जो विधायी नियंत्रण के लिए अहम है।
- BJP का दावा: BJP चाहती है कि यह पद उसी के पास रहे, क्योंकि पिछली विधानसभा में भी भाजपा के नंद किशोर यादव ही अध्यक्ष थे।
- JDU का तर्क: JDU का मानना है कि गठबंधन में संतुलन बनाए रखने के लिए इस बार यह पद उसे मिलना चाहिए। पिछली बार JDU के नरेंद्र नारायण यादव उपाध्यक्ष थे, इसलिए अब पार्टी अध्यक्ष पद की दावेदार है।
- उच्च-स्तरीय बैठक: इस पद को लेकर दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच दिल्ली में उच्च स्तर की बैठक होने वाली है।

मंत्रिमंडल और विभागों का बंटवारा
मंत्रिमंडल के स्वरूप पर भी चर्चा जोरों पर है। रिपोर्टों के अनुसार, नई सरकार में भाजपा और जेडीयू कोटे से बराबर-बराबर मंत्री बनाए जा सकते हैं, जो शक्ति संतुलन को दर्शाता है।
- अधिकतम संख्या: विधानसभा और विधान परिषद की सीटों को हिसाब से बिहार में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं।
- प्रमुख मंत्रालय: अध्यक्ष पद के अलावा, कई बड़े मंत्रालयों को लेकर भी रस्साकशी जारी है। शिक्षा, गृह, सड़क निर्माण, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख और जन-केंद्रित विभागों को लेकर दोनों दलों की प्राथमिकताएँ स्पष्ट होंगी। JDU से संजय झा और ललन सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं के दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है ताकि इन मुद्दों पर अंतिम सहमति बनाई जा सके।
छोटे सहयोगी दलों को सरकार में प्रतिनिधित्व
NDA के छोटे सहयोगी दल, जैसे लोजपा (रामविलास), हम (सेक्युलर) और रालोसपा के साथ भी भाजपा ने अलग से चर्चा की है।
- प्रतिनिधित्व का फॉर्मूला: सूत्र बताते हैं कि नई सरकार में उनकी भूमिकाओं को लेकर एक प्रारंभिक सहमति बन चुकी है। प्रस्तावित फॉर्मूले के अनुसार, हर छह विधायकों के बदले एक मंत्री पद का आवंटन किया जाएगा। इससे सभी सहयोगियों को नई सरकार में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है।
NDA की नई सरकार के गठन के साथ बिहार की राजनीति एक नई दिशा ले रही है। मंत्रालयों के बंटवारे और अध्यक्ष पद पर लिया गया कोई भी निर्णय गठबंधन की भविष्य की मजबूती और स्थिरता को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। सभी की निगाहें अब 19 नवंबर की निर्णायक बैठकों पर टिकी हैं।
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