लखनऊ (Uttarakhand Tehelka): समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को 'डबल पैन कार्ड' मामले में 7 साल की सजा सुनाए जाने और तुरंत Jail भेजे जाने पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश ने इस कार्रवाई को 'नाइंसाफ़ी' और 'जुल्म की हदें पार' करने वाला बताते हुए सत्ता के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। सपा प्रमुख की यह प्रतिक्रिया राजनीतिक गलियारों में गरमाहट पैदा कर चुकी है और इसे आगामी चुनावों से पहले सपा द्वारा एक बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में देखे जाने की संभावना है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला 'डबल पैन कार्ड' से जुड़ा है, जो अब्दुल्ला आजम के खिलाफ दर्ज कराया गया था। रामपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने आजम खान और उनके विधायक पुत्र अब्दुल्ला आजम को 15 नवंबर 2025 को 7-7 साल के कारावास (सजा) की सजा सुनाई। उन पर आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने दो अलग-अलग जन्म तिथियों का इस्तेमाल करके दो पैन कार्ड बनवाए थे, जिसमें से एक में जन्म तिथि गलत थी। कोर्ट ने माना कि आजम खान इस साजिश में शामिल थे।

कोर्ट का फैसला आते ही, पिता-पुत्र दोनों को पुलिस ने न्यायिक हिरासत में लिया और तत्काल Jail भेज दिया गया। यह कानूनी कार्रवाई इस मायने में महत्वपूर्ण है कि यह उत्तर प्रदेश के एक सबसे कद्दावर विपक्षी नेता के खिलाफ हुई है। इस कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल ला दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई का उद्देश्य विपक्ष को कमजोर करना है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे कानून का राज स्थापित करने के रूप में पेश कर रहा है।
अखिलेश यादव की कड़ी प्रतिक्रिया और सरकार पर आरोप
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना पर अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X का सहारा लिया और इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया। उन्होंने अपनी पोस्ट में साफ तौर पर लिखा, "सत्ता के गुरूर में जो नाइंसाफ़ी और जुल्म की हदें पार कर देते हैं, वो ख़ुद एक दिन क़ुदरत के फ़ैसले की गिरफ़्त में आकर एक बेहद बुरे अंत की ओर जाते हैं। सब, सब देख रहे हैं।" अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर निशाना साधता है, जिसमें उन्होंने आजम खान को Jail भेजने के पीछे की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
सपा नेता लगातार यह दावा करते रहे हैं कि आजम खान और उनके परिवार पर दर्ज किए गए सभी मुकदमे राजनीति से प्रेरित हैं और उन्हें झूठे तरीके से फंसाया जा रहा है। अखिलेश यादव ने कई बार सार्वजनिक मंचों से यह बात दोहराई है कि उनकी पार्टी इस Jail की कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला मानती है। सपा का कहना है कि वे इस न्यायिक निर्णय का अध्ययन करने के बाद इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे और न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे।
राजनीतिक निहितार्थ और Jail का प्रभाव
आजम खान, समाजवादी पार्टी के एक प्रमुख मुस्लिम चेहरा हैं और उनका पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गहरा प्रभाव है। रामपुर की सीट और आसपास के क्षेत्र में उनका जनाधार काफी मजबूत माना जाता है। एक बड़े नेता का इस तरह Jail में होना सपा के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे वह आगामी चुनावों से पहले 'तानाशाही' के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है, ताकि अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट किया जा सके।
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यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आजम खान लगभग दो महीने पहले 23 सितंबर को ही सीतापुर Jail से रिहा हुए थे, लेकिन उन्हें तुरंत वापस Jail जाना पड़ा, जिससे उनकी राजनीतिक सक्रियता पर अल्प विराम लग गया है। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम भी पहले लगभग नौ महीने Jail में बिता चुके हैं। आलोचकों का मानना है कि मुकदमों और Jail की इस श्रृंखला ने आजम खान के राजनीतिक करियर को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
सपा नेताओं का आरोप है कि यह Jail भेजने की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया की आड़ में विपक्ष को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है। उनका दावा है कि सरकार अपनी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। वहीं, सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी बड़े या छोटे व्यक्ति को गलत काम करने पर सजा मिलेगी। अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि यह Jail प्रकरण आगामी दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा और भावनात्मक मुद्दा बना रहेगा। इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं कि सपा इसे जनता के बीच किस तरह से प्रस्तुत करती है।
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