शिक्षा के आधुनिक परिवेश में केवल किताबी ज्ञान अब पर्याप्त नहीं रह गया है। इसी विचार को आत्मसात करते हुए भानु प्रताप पब्लिक स्कूल ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने इसे क्षेत्र के अग्रणी संस्थानों की पंक्ति में खड़ा कर दिया है। विद्यालय के प्राचार्य महेश चंद्रा के दूरदर्शी विजन के फलस्वरूप संस्थान ने अपने शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण से लैस करने की योजना पर काम शुरू किया था। इसी कड़ी में विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक अक्षय शर्मा ने वैश्विक स्तर की दो सबसे बड़ी संस्थाओं यूनेस्को और यूनिसेफ से अपनी विशेषज्ञता प्रमाणित कराकर विद्यालय के गौरव को बढ़ाया है।
तकनीकी कौशल और डिजिटल साक्षरता का समावेश
आज का युग सूचना प्रौद्योगिकी का है जहाँ हर विद्यार्थी डिजिटल उपकरणों से घिरा हुआ है। ऐसे में एक शिक्षक का डिजिटल रूप से साक्षर होना अनिवार्य है। अक्षय शर्मा ने यूनेस्को से डिजिटल टीचर सर्टिफिकेट प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया है कि भविष्य की कक्षाएं अधिक संवादात्मक और प्रभावी होने वाली हैं।

यह प्रशिक्षण शिक्षकों को आधुनिक टूल्स के सही उपयोग और ऑनलाइन शिक्षण की बारीकियों को समझने में मदद करता है। इसके माध्यम से विद्यालय अब अपने छात्रों को न केवल तकनीक का उपयोग करना सिखाएगा बल्कि उन्हें साइबर सुरक्षा और डिजिटल नैतिकता के प्रति भी जागरूक करेगा।
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
डिजिटल प्रगति के साथ-साथ वर्तमान समय में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। यूनिसेफ द्वारा प्रदान किया गया मेंटल हेल्थ एंड साइकोसोशल सपोर्ट सर्टिफिकेट इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह विशेषज्ञता दर्शाती है कि विद्यालय परिसर में अब विद्यार्थियों के भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को समझने के लिए एक प्रमाणित ढांचा उपलब्ध है।

अक्षय शर्मा की यह उपलब्धि सुनिश्चित करती है कि छात्र एक तनावमुक्त वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सकें और अपनी समस्याओं को खुलकर साझा कर सकें। यह पहल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में सहायक सिद्ध होगी।
प्रेरणादायी नेतृत्व और भविष्य की कार्ययोजना
प्राचार्य महेश चंद्रा के अनुसार विद्यालय का लक्ष्य हमेशा से ही ऐसी शिक्षा व्यवस्था देना रहा है जो छात्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सके। अक्षय शर्मा की प्रतिबद्धता और उनके द्वारा अर्जित यह ज्ञान अब विद्यालय की दैनिक शिक्षण पद्धति का हिस्सा बनेगा। यह संस्थान अब न केवल एक शैक्षणिक केंद्र है बल्कि एक ऐसा सुरक्षित स्थान भी है जहाँ तकनीक और संवेदनशीलता का अद्भुत तालमेल देखने को मिलता है। इस उपलब्धि ने यह संदेश दिया है कि यदि शिक्षण संस्थान नवाचार और प्रशिक्षण को प्राथमिकता दें तो वे शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार ला सकते हैं।
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