उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित शिक्षा निदेशालय शनिवार को रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। ननूरखेड़ा स्थित इस महत्वपूर्ण कार्यालय में सामान्य कामकाज चल रहा था, तभी रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ के साथ आए प्रतिनिधियों और निदेशालय के अधिकारियों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ गई कि वहां मौजूद भीड़ ने हिंसक रुख अख्तियार कर लिया। कार्यालय के भीतर फर्नीचर को नुकसान पहुंचाया गया और तोड़फोड़ के साथ ही वहां तालाबंदी की कोशिश भी की गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और कर्मचारियों के बीच दहशत का माहौल बन गया।

निदेशक अजय कुमार नौटियाल पर जानलेवा प्रहार

​इस पूरे बवाल का सबसे दुखद पहलू प्राथमिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौटियाल के साथ हुई मारपीट रही। बताया जा रहा है कि एक निजी स्कूल के नाम परिवर्तन से जुड़े विवाद के चलते कुछ लोगों ने उग्र होकर निदेशक पर हमला बोल दिया। इस हमले में नौटियाल के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। घायल निदेशक का पक्ष है कि विवादित मामला पहले से ही शासन स्तर पर विचाराधीन है और विभाग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज दी थी, लेकिन इसके बावजूद उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।

शिक्षकों का अल्टीमेटम और बोर्ड परीक्षा का बहिष्कार

​जैसे ही इस हमले की खबर प्रदेश भर में फैली, राजकीय शिक्षक संघ और अन्य कर्मचारी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया। शिक्षकों का कहना है कि यदि एक उच्च पदस्थ अधिकारी अपने ही कार्यालय में सुरक्षित नहीं है, तो आम कर्मचारी की स्थिति क्या होगी। संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं हुई, तो प्रदेश के सत्तर हजार शिक्षक सड़कों पर उतरेंगे। सबसे चिंताजनक बात यह है कि शिक्षकों ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं के बहिष्कार की धमकी दी है, जिससे शिक्षा विभाग और सरकार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।


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निदेशालय में पुलिस छावनी और आगे की कार्रवाई

​वर्तमान में शिक्षा निदेशालय का परिसर भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण छावनी जैसा नजर आ रहा है। कर्मचारियों ने पूर्ण कार्यबहिष्कार की घोषणा कर दी है और वे परिसर में ही धरने पर बैठ गए हैं। पुलिस प्रशासन ने तहरीर के आधार पर जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन स्थिति को शांत करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन शिक्षकों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। शासन की ओर से भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि स्थिति और अधिक न बिगड़े।

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