कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस महकमे को शर्मसार कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वीडियो में केपी अग्रहारा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर गोविंदराजू को लोकायुक्त अधिकारियों द्वारा हिरासत में लेते हुए देखा जा सकता है। चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तारी के समय इंस्पेक्टर ने भागने या छिपने के बजाय अपनी वर्दी की गरिमा को दरकिनार कर बीच सड़क पर चिल्लाना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि इंस्पेक्टर ने यह ड्रामा केवल इसलिए किया ताकि वहां मौजूद भीड़ को गुमराह कर सहानुभूति हासिल की जा सके।

वायरल वीडियो

जमानत के बदले मांगी थी मोटी रकम

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एमडी अकबर नामक व्यक्ति की शिकायत से हुई। अकबर पर धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज था और इसी केस में मदद करने तथा जमानत दिलाने के एवज में इंस्पेक्टर गोविंदराजू ने 5 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की मांग की थी। बताया जा रहा है कि आरोपी इंस्पेक्टर पहले ही एक लाख रुपये एडवांस के तौर पर ले चुका था। जब वह शेष 4 लाख रुपये की रकम स्वीकार कर रहा था, तभी लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाकर उसे धर दबोचा। लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और अब इस केस की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं कि क्या इस भ्रष्टाचार के खेल में कुछ अन्य लोग भी शामिल थे।


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पूर्व पुलिस कमिश्नर और जनता का आक्रोश

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बेंगलुरु के पूर्व पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि एक पुलिस अधिकारी द्वारा वर्दी पहनकर इस तरह का आचरण करना बेहद शर्मनाक है। उनके अनुसार, कर्नाटक पुलिस बल में एक लाख से अधिक समर्पित कर्मचारी हैं जो दिन-रात ईमानदारी से सेवा करते हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं पूरी फोर्स की छवि को धूमिल कर देती हैं। वहीं इंटरनेट पर लोग इस घटना को लेकर तरह-तरह की टिप्पणी कर रहे हैं। आम जनता का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए। सोशल मीडिया पर लोग मांग कर रहे हैं कि ऐसे अधिकारियों पर कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी लोक सेवक कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत न कर सके।

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