बड़वानी जिले के राजपुर थाना क्षेत्र से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने समाज और रिश्तों की पवित्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सत्रह वर्षीय किशोर ने अपनी ही मासूम सात साल की रिश्तेदार को अपनी हवस का शिकार बनाया और पहचान उजागर होने के डर से उसकी निर्मम हत्या कर दी। यह घटना उस समय हुई जब बच्ची अपने घर में बेखौफ सो रही थी। आरोपी की उम्र महज सत्रह साल दस महीने है, लेकिन उसके द्वारा अंजाम दिया गया कृत्य किसी भी क्रूरतम अपराधी से कम नहीं है। पुलिस अधीक्षक जगदीश डाबर ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी ने बच्ची के साथ ज्यादती करने के बाद उसे इंदिरा सागर नहर में फेंक दिया था।
आधी रात को रची गई खौफनाक साजिश
पुलिस की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि यह पूरी वारदात रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात को अंजाम दी गई। पीड़िता की मां उसे चार साल पहले ही छोड़ चुकी थी और पिता काम के सिलसिले में इंदौर गए हुए थे। बच्ची घर में अपने दादा-दादी के साथ गहरी नींद में थी। इसी बीच, घर में ही रहने वाले आरोपी रिश्तेदार की नियत डोल गई। वह सोती हुई बच्ची को अपने कंधे पर उठाकर लगभग एक किलोमीटर दूर सुनसान जगह पर ले गया। वहां उसने मासूम के साथ दुष्कर्म किया। शारीरिक पीड़ा के कारण जब बच्ची चीखने-चिल्लाने लगी, तो पकड़े जाने के डर से आरोपी ने उसे पास की नहर में धकेल दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी इतना शातिर निकला कि वह चुपचाप वापस घर आकर सो गया जैसे कुछ हुआ ही न हो।
पकड़े जाने के डर से रचा तलाश का नाटक
अगली सुबह जब घर में बच्ची के लापता होने की खबर फैली, तो आरोपी ने खुद को बचाने के लिए एक नई चाल चली। वह ग्रामीणों और परिजनों के साथ मिलकर बच्ची को खोजने का नाटक करने लगा ताकि किसी को उस पर संदेह न हो। हालांकि, पुलिस की अनुभवी नजरों से उसकी घबराहट छिप नहीं सकी। राजपुर थाना प्रभारी विक्रम सिंह बामनिया और उनकी टीम को आरोपी के हाव-भाव पर शक हुआ, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान आरोपी टूट गया और उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। आरोपी केवल चौथी कक्षा तक पढ़ा है और मजदूरी का काम करता है। पुलिस ने उसे किशोर न्यायालय में पेश किया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
---समाप्त---