बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के बाद अब सभी की निगाहें आने वाली तीन अगस्त पर टिकी हुई हैं, जब इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले के लिए वोटों की गिनती की जाएगी। चुनाव आयोग से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल तीन लाख उनासी हजार छह सौ ग्यारह मतदाता दर्ज हैं, जिन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करना था। 

इस बार के चुनाव मैदान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यहां कुल 25 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिससे मुकाबला कई मायनों में बिखर गया है। इतने सारे प्रत्याशियों के चुनावी मैदान में होने के बावजूद जिस तरह से मतदाताओं ने उदासीनता दिखाई और मतदान का प्रतिशत पैंतीस से भी कम रहा, उसने राजनीतिक दलों की धड़कनों को तेज कर दिया है।

​कुल मतदाताओं की इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद एक तिहाई से भी कम लोगों का मतदान केंद्रों तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि जीत और हार का फैसला बहुत ही कम और अनुपातिक वोटों के अंतर पर टिक सकता है। जब चुनावी मैदान में पच्चीस उम्मीदवार उतरे हों, तो वोटों का बिखराव होना स्वाभाविक माना जाता है। 

ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि बांकीपुर के पारंपरिक शहरी मतदाता किस उम्मीदवार की झोली में अपने वोट डालते हैं। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के आने से मुकाबला भले ही त्रिकोणीय या बहुकोणीय बनता दिख रहा हो, लेकिन कम मतदान ने यह साबित कर दिया है कि किसी भी दल के लिए अपनी जीत का दावा करना आसान नहीं होगा।


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​विश्लेषकों का मानना है कि जब मतदान का प्रतिशत गिरता है, तो उसका सीधा असर राजनीतिक दलों के कैडर और उनके पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ता है। जो पार्टी अपने मूल मतदाताओं को बूथ तक खींचने में सफल रही होगी, पलड़ा उसी की तरफ झुकने की उम्मीद सबसे ज्यादा होती है। 

बांकीपुर जैसे वीआईपी और प्रतिष्ठित क्षेत्र में, जो लंबे समय से भारतीय का गढ़ माना जाता रहा है, वहां इस तरह के आंकड़े आना एक बड़ा राजनीतिक संदेश देते हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर भाजपा अपनी साख बचाने की कोशिश में है, तो वहीं राजद और जनसुराज इस सेंधमारी का पूरा फायदा उठाने की फिराक में हैं।

​तीन अगस्त को होने वाली मतगणना के दिन जब इवीएम खुलेगी, तब यह साफ हो जाएगा कि पच्चीस में से किस उम्मीदवार के सिर पर जीत का सेहरा सजता है। कम मतदान के साए में और इतनी बड़ी संख्या में प्रत्याशियों की मौजूदगी के बीच यह परिणाम आने वाले समय की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। 

जनता ने मतदान के दिन भले ही दूरी बनाई हो, लेकिन उनके द्वारा डाले गए ये सीमित वोट ही तय करेंगे कि बांकीपुर का अगला विधायक कौन बनेगा और इस त्रिकोणीय संघर्ष में बाजी किसके हाथ लगती है।

​बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उमीदवारों के भाग्य का फैसला 3 अगस्त को होने वाली मतगणना से होगा। 25उय उम्मीदवारों के मैदान में होने और कम मतदान दर्ज किए जाने के कारण इस चुनाव के नतीजे बेहद चौंकाने वाले हो सकते हैं, जिस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हैं।

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